राष्ट्रनायक न्यूज

Rashtranayaknews.com is a Hindi news website. Which publishes news related to different categories of sections of society such as local news, politics, health, sports, crime, national, entertainment, technology. The news published in Rashtranayak News.com is the personal opinion of the content writer. The author has full responsibility for disputes related to the facts given in the published news or material. The editor, publisher, manager, board of directors and editors will not be responsible for this. Settlement of any dispute

मुख्यमंत्री का अमर्यादित हरकत और शर्मनाक समर्थन

अहमद अली।छपरा

किसी से कोई बात कहने या किसी के साथ कोई व्यवहार करने से पहले यह आवश्यक है कि हम स्वयं को उसकी जगह रखकर यह कल्पना करें कि वही व्यवहार यदि हमारे साथ किया जाए तो हमें कैसा महसूस होगा। ऐसा करने से यह समझना आसान हो जाता है कि हमारी हरकतें दूसरों पर क्या असर डालती हैं। इसी संदर्भ में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर के साथ किया गया व्यवहार गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसमें वो उसके चेहरे से हिजा़ब खींच रहे हैं। मेरा सीधा प्रश्न उन सभी लोगों से है जो इस कृत्य का समर्थन कर रहे हैं—विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के भाजपा मंत्री संजय निषाद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से—कि यदि यही व्यवहार उनके परिवार की किसी महिला के साथ सार्वजनिक रूप से किया गया होता, तो क्या वे इसे सहजता से स्वीकार कर पाते? उनसे भी जो वहाँ खडे़ हैं और हंसते हुए मजे़ ले रहे हैं। यह मामला किसी एक समुदाय की महिला का नहीं, बल्कि पूरे महिला समाज की गरिमा और सम्मान से जुड़ा हुआ है। कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने “बेटी समझकर” ऐसा किया। यह तर्क न केवल बचकाना है, बल्कि अपमानजनक भी है। क्या कोई सभ्य व्यक्ति भरी सभा में अपनी बेटी के साथ इस प्रकार का अभद्र व्यवहार कर सकता है? चिकित्सा पेशे में किसी प्रकार का अनिवार्य ड्रेस कोड नहीं है, जिसमें चेहरे का खुला होना जरूरी हो। और यदि मुख्यमंत्री को किसी बात पर आपत्ति ही थी, तो उसे व्यक्त करने के कई सम्मानजनक और मर्यादित तरीके मौजूद थे। यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। विधानसभा में महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी , महिलाओं को अनावश्यक रूप से छूने की बेचैनी, जबरन माला पहनाने जैसी घटनाओं पर यदि गंभीरता से दृष्टि डाली जाए, तो यह निष्कर्ष निकालना कठिन नहीं होता कि समस्या केवल क्षणिक व्यवहार की नहीं, बल्कि मानसिकता की है। हाँ, पीड़ित महिला डॉक्टर द्वारा विरोध के रूप में नौकरी छोड़ने के निर्णय से सहमत होना कठिन है। यह एक पलायनवादी और आत्मघाती प्रतिक्रिया कही जा सकती है। लोकतंत्र में विरोध के अनेक संवैधानिक और प्रभावी रास्ते उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग किया जाना चाहिए था। दुर्भाग्य से, भविष्य में ऐसे और भी अभद्र दृश्य देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि महिलाओं के सम्मान को लेकर सत्ता पक्ष की नीतियों और व्यवहार का मूल्यांकन हम अतीत की अनेक घटनाओं में पहले ही कर चुके हैं।
(लेखक के अपने विचार है)