नई दिल्ली, (एजेंसी)। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने सरकार बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। काबुल में मंच तैयार किए जा रहे हैं। बैनर-पोस्टर छपवाए जा रहे हैं। संभव है कि सरकार को लेकर तालिबान की तरफ से आज बड़ा ऐलान हो सकता है। सूत्रों के अनुसार तालिबान की टॉप लीडरशिप काउंसिल की तीन दिनों तक लगातार बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता तालिबान के सबसे बड़े नेता हिब्तुल्लाह अखुंदजादा ने की। सूत्रों के अनुसार तालिबान अफगानिस्तान में ईरान मॉडल के आधार पर सरकार बनाने का प्लान बना रहा है। जिसके तहत ऐसा इस्लामिक देश बनाया जाएगा जहां सुप्रीम लीडर देश का मुखिया होगा। माना जा रहा है कि ये पद हिब्तुल्लाह अखुंदजादा को दिया जाएगा।
शासन का ईरान मॉडल: सुप्रीम लीडर को अफगानिस्तान में जाईम या रहबर कहा जाता है। दोनों का ही अर्थ नेता है। माना जाता है कि सुप्रीम लीडर का फैसला ही आखिरी होगा। कुछ ऐसी ही व्यवस्था ईरान में भी है। जहां अयातुल्ला अली खामेनेई सुप्रीम लीडर हैं। सर्वोच्च नेता ईरान की सशस्त्र सेनाओं का प्रधान सेनापति होता है। ईरान के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति सर्वोच्च नेता करते हैं. मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च नेता के प्रति ही उत्तरदायी होते हैं। इसके साथ ही वहां शूरा काउंसिल है और इसके बाद संसद और राष्ट्रपति। राष्ट्रपति सीधे जनता चुनती है।
कौन है अखुंदजादा: अखुंदजादा 1961 में अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के पंजवई जिले में पैदा हुआ। वह नूरजई कबीले से ताल्लुक रखता है। उसके पिता मुल्ला मोहम्मद अखुंद एक धार्मिक स्कॉलर थे। वो गांव की मस्जिद में इमाम थे। हिब्तुल्लाह ने अपने पिता से ही तालीम हासि की है। अखुंदजादा अल-कायदा के चीफ अयमान अल जवाहिरी का करीबी समझा जाता है। कहा तो ये भी जाता है कि जवाहिरी ने उसे ‘अमीर’ का ओहदा सौंपा था। यह पदवी भी धार्मिक मामलों में फैसला करने वाले सर्वोच्च नेता की थी।
जल्द आएगा सामने: अखुंदजादा ने तालिबान की कमान वर्ष 2016 में संभाली थी। पूर्व नेता अख्तर मंसूर के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद यह नियुक्ति की गई थी। 50 वर्षीय हैबतुल्लाह अखुंदजादा को एक सैनिक/लड़ाके के बजाय एक कानूनविद के रूप में बताया गया है और उसे संगठन में इस्लाम की चरम व्याख्याओं का लागू करने का श्रेय दिया गया है। तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद से अखुंदजादा का अब तक कोई बयान भी सामने नहीं आया है। तालिबान के उप-प्रवक्ता बिलाल करीमी का कहना है कि हिबतुल्ला अखुंदजादा शुरूआत से ही कंधार में हैं और जल्द ही लोगों के सामने आ जाएग।


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