राष्ट्रनायक न्यूज।
एकमा (सारण)। कड़ाके की ठंड से आम ल़ोगोंं का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो ही गया है। अब इस ठंड का प्रकोप सरसों के लहलहाते पौधों पर हो गया है। नतीजतन, पौधे एवं फूल सिकुड़ने लगे हैं। जिन किसानों ने अच्छी एवं अत्याधिक उपज के लिए गेहूं की बजाय सरसों को ही प्राथमिकता देते हुए इस बार सरसों की ही बोआई करना उचित समझा, वे अब फूलों के सिकुड़न को देख चिंतित एवं परेशान हो उठे हैं। किसानों की परेशानी का सबब यह है कि जिस क़दर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे यह संभावना बढ़ गरीब है कि शीघ्र ही सरसों के पौधों पर लाही नामक कीड़ों का प्रकोप होने ही वाला है। ये कीड़े पौधों पर चिपक कर सारा रस ही चूस लेते हैं एवं फसल बर्वाद हो जाता है। इधर किसान सरसों फसल को लेकर परेशान हैं। सोंचा था महंगें सरसों तेल के चलते सरसों की पैदावार ही गेहूं से अधिक लाभप्रद होगा। लेकिन ठंडक की मार से सरसों की फसल बर्वादी के पायदान पर पहुंच गयी है, तो दूसरी ओर बिहार के कृषि वैज्ञानिक एवं बिहार राज्य कृषि विभाग कुम्भकर्णी नींद्रा में तल्लीन है। इस आपात अवसर पर कृषि वैज्ञानिक ऐसे चिंतित किसानों को सुरक्षात्मक कोई सुझाव देना शायद उचित नहीं समझ रहे।


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