राष्ट्रनायक न्यूज

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पोषण पखवाड़ा के तहत परांपरिक व्यंजनों का लगाया गया प्रदर्शनी, कुपोषण से बचाव की मिली जानकारी

  • जिले में संचालित है राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा
  • जिले के पांच जगहों पर पोषण प्रदर्शनी का हुआ आयोजन
  • सदर एसडीओ समेत अन्य अधिकारियों ने किया अवलोकन

राष्ट्रनायक न्यूज।

छपरा (सारण)कुपोषण मुक्त सामाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए आईसीडीएस के द्वारा जिले में राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। पोषण पखवाड़ा के तहत गुरूवार को जिले के छपरा शहरी क्षेत्र, मांझी, सोनपुर, मशरक, मढौरा में पोषण प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें परांपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगायी गयी। सदर अनुमंडल पदाधिकारी अरूण कुमार ने शहर के थाना चौक पर पोषण प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत पौष्टिक आहार तथा पारंपरिक भोजन को बढ़ावा देने के लिए जिले के सभी आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होने कहा कि पोषण अभियान एक सरकारी कार्यक्रम न होकर एक जन आंदोलन है और इसमें जन-जन की भागीदारी वांछित है। उन्होंने बताया कि 21 मार्च से 4 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है।  जीवन में स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है और इसके बिना जीवन अधूरा है। पोषण पखवाड़ा के तहत 21 से 27 मार्च तक बच्चों के विकास एवं स्वास्थ्य की जांच व निगरानी की जाएगी। 28 व 29 मार्च को जल प्रबंधन को लेकर पोषण पखवाड़ा के तहत कार्य किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 30 मार्च से एक अप्रैल तक एनीमिया पर वार्तालाप, जांच व उपचार के कार्य किए जाएंगे। इसी प्रकार से दो से चार अप्रैल तक स्वस्थ मां व बच्चे के लिए पारंपरिक व्यंजन पर फोकस किया जाएगा। इस दौरान अपर अनुमंडल पदाधिकारी अर्शी शाहिन, डीपीओ उपेंद्र ठाकुार, सदर शहरी क्षेत्र के सीडीपीओ कुमारी उर्वशी, पोषण अभियान के जिला समन्वयक सिद्धार्थ कुमार सिंह, निभा कुमारी समेत अन्य मौजूद थे।

एनिमिया से बचाव के लिए पौष्टिक आहार जरूरी

सदर शहरी क्षेत्र के सीडीपीओ कुमारी उर्वशी ने बताया कि अभिभावक माताओं को स्थानीय स्तर पर पाए जाने वाले अनाज, सब्जी, फल, विटामिन तत्व से अवगत कराया। पोषण के अभाव में खून की कमी, चक्कर आना, सांस फूलना, थकान महसूस होना कुपोषण और एनीमिया का लक्षण है। अक्सर गर्भवती और शिशुवती महिलाओं में ये लक्षण पाये जाते हैं। महिलाएं अपने खान-पान में संतुलित आहार के साथ पत्तेदार सब्जी को भोजन में शामिल कर कुपोषण व एनीमिया से उबर सकते हैं।

सुपोषित समाज के लिए पौष्टिक आहार जरूरी:

आईसीडीएस के डीपीओ उपेंद्र ठाकुर ने कहा कि मुख्य रूप से महिलाएं, धात्री महिलाएं तथा नवजात शिशु किशोरियां व बच्चों के लिए है। बच्च्चों को पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खिलाएं। आइएफए और विटामिन-ए की निर्धारित खुराक दिलवाएं। पेट के कीड़ों से बचने के लिए 12 से 24 महीने के बच्चे को एल्बेंडाजोल की आधी गोली तथा 24 से 59 महीने के बच्चे को एक गोली साल में दो बार आंगनवाड़ी केंद्र पर दिलवाएं। आंगनवाड़ी केन्द्र पर नियमित रूप से लेकर जाएं तथा उसका वजन अवश्य करवाएं। बौद्धिक विकास के लिए पौष्टिक आहार उसकी उम्र के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, एएनएम या डाक्टर द्वारा बतायी गयी मात्रा के अनुसार दें। पांच साल की उम्र तक सूची अनुसार सभी टीके नियमित रूप से जरूर लगवाएं।