बाढ़: आधुनिक राजनीति के प्रथम पद यात्री सैद्धांतिक एवं मूल्यों के राजनीति के अगुआ पूर्व प्रधान मंत्री श्री चंद्रशेखर जी को नमन करते हुए प्रेम शंकर सिंह चौहान ने कहा कि आज जब देश एक तरफ कोरोना जैसी बीमारी के संक्रमण से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ एक लंबे अरसे से भारतीय राजनीति खुद संक्रमण से मुक्ति का द्वार ढूंढ रही है कि ऐसे में फिर कोई चंद्रशेखर अवतरित होकर राजनीति को संक्रमण मुक्त करने का अभियान चलाएगा ।आज जब भारतीय राजनीति से जिस तरह से सिद्धांतों एवं मूल्यों का क्षरण हुआ है।ऐसे में चंद्रशेखर के विचारों की प्रासंगिकता बढ़ जाती है खासकर आज जो समाजवाद का बिगड़ा हुआ स्वरूप है।अगर वर्तमान समय में वे होते तो निश्चित ही मैं कह सकता हूं कि इस स्वरूप को देखकर काफी व्यथित होते।मेरा व्यक्तिगत मानना है कि चंद्रशेखर का मतलब समाजवाद का विश्वविद्यालय जिस विश्वविद्यालय में भारत के कई बड़े राजनीतिक हस्तियों ने अपने जरूरत के हिसाब से समाजवाद का लबादा ओढा बाद में उनको समाज से मतलब रहा ना वाद से या यूं कहें अपने मनोरथ सिद्धि के लिए जरूरत के हिसाब से समाजवाद को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। सत्ता प्राप्ति के बाद वही समाजवाद परिवारवाद एवं व्यक्तिवाद में बदल गया। आज उनकी 93 जयंती है।इस अवसर पर अपने मित्रों एवं अध्यक्ष जी के चाहने वालों को मैं चंद्रशेखर विचार मंच की ओर से एक संदेश देना चाहूंगा कि इस राष्ट्र के निर्माण हेतु मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है।कुछ दिनों पहले राज्यसभा सांसद हरिवंश जी के द्वारा लिखित पुस्तक का जो लोकार्पण माननीय प्रधानमंत्री के द्वारा हुआ उन्होंने चंद्रशेखर जी को अंतिम आदर्शवादी राजनेता बताया क्यों यह एक विचारणीय प्रश्न है शायद इसीलिए कि वह सन्यासी नहीं थे लेकिन लालच से ऊपर थे वह पारिवारिक थे लेकिन परिवारवादी नहीं थे वह दल नहीं खड़ा कर सके लेकिन दलों के नेता थे कुछ लोग उन्हें नेताओं के नेता भी कहते थे मेरी नजरों में अध्यक्ष जी वह पहले और अंतिम राजनेता थे जो गरीबों और कार्यकतार्ओं के नेता थे।उनकी जयंती के अवसर पर मैं सरकार से आग्रह करूंगा कि समाजवाद के उस संत को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए एवं उनकी जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए क्योंकि उनका यह आदर्श पूर्ण व्यक्तित्व सड़क से संसद तक का अनुकरणीय सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापद है।


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