राष्ट्रनायक न्यूज।
पटना (बिहार)। शिक्षा एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल इस माह समाप्त होने को देखते हुए सरकार द्वारा परामर्शदातृ समिति के गठन का अध्यादेश जारी करना स्वागतयोग्य कदम है। साथ ही यह कार्यरत जनप्रतिनिधियों के हित में है। राज्य में फैले कोरोना संक्रमण के कारण चुनाव कराना संभव नहीं था, इसीलिए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत परामर्श दातृ समिति के गठन का फैसला किया है।
श्री चौधरी ने कहा कि कुछ विपक्षी दल इस संबंध में तथ्यहीन एवं भ्रामक बातें उठाकर अपनी प्रासंगिकता बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ नेतागण निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल को बढ़ाने की बात भी उठा रहे हैं। ऐसी बातें अनर्गल ही नहीं बल्कि हास्यास्पद हैं। इन्होंने संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को देखने एवं समझने की जहमत ही नहीं उठायी। 73वें एवं 74वें संशोधन के द्वारा संविधान में भाग-9 जोड़ा गया एवं इसके अनुच्छेद 243-ई में स्पष्ट है कि इन संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा। सामान्य समझदारी की बात है कि बिना संविधान संशोधन के इनके कार्यकाल को बढ़ाया ही नहीं जा सकता। हो सकता है कि कुछ दिन बाद में ये लोग विधायकों एवं सांसदों के कार्यकाल को भी बढ़ाने की बात करने लगेंगे। उन्होंने कहा कि लगता है कि सरकार के विरोध में संविधान, नियम एवं कानून की धज्जियां उड़ाने से भी लोग परहेज नहीं करते। शिक्षा मंत्री ने कहा कि निराधार एवं भ्रामक बातों से बिहार की जनता गुमराह नहीं होती, सिर्फ ये खुद को गफलत में रख सकते हैं।


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