तोहरा दूधवा के मोल ना दियाई ए माई , तोहरा ममता में सागर ना समाई ए माई!
अखिलेश्वर पांडेय
जलालपुर(सारण)- शर्त लगी दुनियां की समस्त खुशियों को एक शब्द में लिखने की, लोग किताब ढूंढते रह गए और हमने “”मां” लिख दी। “मां” यह शब्द अपने आप में इतना विस्तृत एवं विशाल है कि इसकी उपमा के लिए इस सृष्टि में कोई वस्तु नहीं है। कोई भी शब्द मां की ममता का बखान नहीं कर सकता।
उक्त बाते जलालपुर बाजार स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत के अध्यापक शिक्षाविद् डा शशिकांत तिवारी ने मातृदिवस पर बताई|उन्होंने कहा कि जो जगत के पालनहार का भी पालन करे वो मां है। भगवान को भी धरती पर अवतार लेने के लिए मां की आवश्यकता होती है। फिर चाहे वो मां यशोदा का रूप हो या मां कौशल्या का। इस मां का न कोई आदि है और न अंत। सृष्टि के पहले भी मां थी और सृष्टि के बाद भी रहेगी। मां अनिर्वचनीय है। जिसके पास मां नहीं है उसके पास सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं होता है और जिसके पास मां है उसके पास कुछ भी नहीं होते हुए भी सब कुछ होता है और वह दुनिया का सबसे सौभाग्यशाली मनुष्य होता है। उन्होंने अाम लोगों खासकर युवा विद्यार्थियों से कहा कि केवल फेसबूक या सोशल मीडिया मे ही नहीं अपितु अपने निजी जीवन में भी मां को स्थान दें, उसके ममता के मोल को समझें, उसकी सेवा और देख रेख करें, क्योंकि इस दुनियां में सब कुछ खो देने के बाद भी मिल सकता है ,पर एक बार मां पिता चले जाएंगे तो पुन: वापस नहीं आएंगे। मां पिता इस दुनिया के लिए धरोहर हैं। इनकी सेवा जरूर करें|


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