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कोरोना लॉकडाउन में अधिकारी एफआईआर की धमकी देकर कार्यपालक सहायकों से 12 घंटे ले रहे है काम, संघ में आक्रोश, आंदोलन की सुगबुगाहट

कोरोना लॉकडाउन में अधिकारी एफआईआर की धमकी देकर कार्यपालक सहायकों से 12-14 घंटे ले रहे है काम, संघ में आक्रोश, आंदोलन की सुगबुगाहट

छपरा (सारण)- कोरोना लॉकडाउन में समाहरणालय सभागार एवं सदर अनुमंडल कार्यालय में इन दिनों कार्यपालक सहायकों से करीब 12-14 घंटे तक कार्य लिया जा रहा है। कार्य के दौरान थोड़ी विलंब होने पर नोडल पदाधिकारियों द्वारा एफआईआर की भी धमकी दी जा रही है। रात करीब 10 बजे तक काम लिया जाता है। ऑनलाइन अपलोडिंग का हो रहा है, इसमें इंटरनेट की भूमिका अधिक होती हैं। फिर भी टारगेट देकर 12-14 घंटे तक सदर एसडीओ कार्यालयके गेट में ताला जड़ कर कार्यपालक सहायकों से जबरन भद्दी-भद्दी अपशब्द बोलते हुए एफआइआर की धमकी देकर काम लिया जा रहा है। साथ ही काम करने वाले इन कार्यपालक सहायकों को सहायक सोशल डिस्टेंशिंक का पालन नहीं अपनी जान जोखिम में डालकर बिना मास्क, गलब्स व सैनेटाईजर के ही कार्य कर रहे है। फिर भी पदाधिकारियों द्वारा फटकार लगा रहै। इसको लेकर कार्यपालक सहायक संघ में काफी आक्रोश व्याप्त हो गया है। संघ के जिलाध्यक्ष निलेश कुमार ने सारण जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन, श्रम संसाधन विभाग, सीएम, राज्यपाल, बीपीएसएम, मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, हाईकोर्ट समेत दर्जनों विभागों के पदाधिकारियों को पत्र भेजकर जिला प्रशासन के पदाधिकारियों द्वारा कार्यपालक सहायकों के साथ किय जा रहे मनमानी को हस्तक्षेप करने की गुहार लगाया है। कार्यपालक सहायको की माने तो लिपिक भी कार्यपालक सहायकों से सौतेलापन व्यवहार करते है। खुद को स्थायी कर्मचारी होने का धौंस दिखाते हुए अधिकारियों की तरह धमकी देते है। जानकारी के अनुसार लॉकडाउन में राशन कार्ड से वंचित लोगों का ऑनलाइन करने एवं राशन कार्ड को आधार से सीडिंग करने का कार्य विभागीय पोर्टल डाउन होने के बाद भी दिन-रात कर रहे है। साथ इन कर्मियों से 12 से 14 घंटे तक कार्य लिया जा रहा है। ऐसे में कार्यपालक सहायक अधिकारियों एवं लिपिकों द्वारा शोषण किया जाना महशुस कर रहे है। इसको लेकर धीरे-धीरे कार्यपालक सहायक संघ में आक्रोश व्याप्त होने लगा है और आंदोलन की सुगबुहाट प्रतीत होने लगा है।

सरकार के अपर सचिव के निर्देश का हो रहा उल्लंघन

कार्यपालक सहायक संघ की माने तो बिहार सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिवर के पत्रांक 45/गो0 दिनांक 20.04.2020 की जिले में जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। उपर से विभिन्न कार्यालयों में कार्यपालक सहायकों को नही आने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की भी धमकी दी जा रही है। संघ के नेताओं ने कहा कि लॉकडाउन की स्थिति में यातायात बाधित होने से महिला कार्यपालक सहायकों जो कार्यालय नहीं पहुंच पा रही है। वहीं अधिकांश कार्यपालक सहायकों के पास बाइक भी नहीं है, अल्प मानदेय में परिवार की परवरीश के लिए आर्थिक प्रबंध कर अन्य श्रोतों से कार्यालय जा रहे है। फिर भी अधिकारी अपनी हनक दिखाते हुए मानसिक एवं शारिरीक शोषण कर रहे है। अगर समय रहे अधिकारियों के व्यवहार में परिवर्तन नहीं हुआ तो लॉकडाउन की प्रवाह किये बगैर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

12 घंटे काम करवाने पर भी कार्यपालक सहायकों को नहीं दी जा रही सुविधा

कार्यपालक सहायकों ने बताया कि सरकार द्वारा अल्पाहार-भोजन के लिए राशि निर्गत करने का पत्र दिया गया है। वो भी नगन्य है। मानदेय भुगतान करने के लिए आवंटन उपलब्ध होने के बाद भी मानदेय नहीं दिया जा रहा है। वहीं विभिन्न कार्यालय के स्थायी कर्मचारी, लिपिक कार्यालय से गायब है, उनकी खोज खबर नहीं लिया जा रहा है। उनका वेतन नियमित भुगतान हो रहा है। लेकिन इस आपदा की घड़ी में कार्य कर रहे है, उनपर हनक दिखाते हुए धमकाया जा रहा है।

संघ ने जिलाध्यक्ष ने कहा- कार्यपालक सहायकों के कार्य प्रणाली में नहीं किया गया सुधार तो होगा कार्य बहिष्कार

कार्यपालक सहायक संघ के जिला अध्यक्ष निलेश कुमार ने बताया कि सरकार ने न्युनतम 33 प्रतिशत कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की बात कह कर हम संविदा कर्मियों के मुंह पर तमाचा मारा है। सरकारी लिपिक व कर्मी के लिए नियम संगत कार्य हो रहा है और नियोजित कार्यपालक सहायकों पर इस नियम को ताक पर रखकर नियंत्री पदाधिकारी प्राथमिकी दर्ज करने की धमकी दे रहे है। कार्रवाई का डर दिखा कर 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है। एक-एक कार्यपालक सहायक 50-50 किलोमीटर की दुरी तय करके कार्यालय जा कर जीविका दीदीयों को दिये फार्म व राशन कार्ड में आधार सिडिंग कर बैंक खाता की इन्ट्री कर रहा है ताकी महामारी की इस आपात स्थिति में जिलावासियों को सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी प्रकार की सहायता प्राप्त हो। परंतु जिला प्रशासन की नजर में न तो हमें कोरोना का खतरा है और न हमारे परिवार को पालन-पोषण की आवश्यकता। आलम यह है कि जब तक हम आंदोलन का रास्ता नहीं चुने तब तक हमें मानदेय भुगतान नही किया जा रहा है। अभी भी सभी कार्यपालक सहायकों का मानदेय जनवरी से भुगतान नहीं हुआ है। महामारी के इस दौर में यदि जिला प्रशासन 30 अप्रैल तक मानदेय भुगतान नही करता है और अधिकारी, लिपिक व अन्य स्थायी कर्मी अपने व्यवहार में परिवर्तन नहीं करते है तो संघ कार्य बहिष्कार करते हुए आंदोलन करने पर बाध्य होंगे। जिले में राशन कार्ड से संबंधित सभी कार्य बंद कर दिया जाएगा। जिसकी पूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।