राष्ट्रनायक न्यूज

Rashtranayaknews.com is a Hindi news website. Which publishes news related to different categories of sections of society such as local news, politics, health, sports, crime, national, entertainment, technology. The news published in Rashtranayak News.com is the personal opinion of the content writer. The author has full responsibility for disputes related to the facts given in the published news or material. The editor, publisher, manager, board of directors and editors will not be responsible for this. Settlement of any dispute

इलेक्ट्रिक कार: आयात शुल्क में कटौती क्यों हो?

राष्ट्रनायक न्यूज।

हाल ही में एक अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माण कंपनी टेस्ला द्वारा निर्मित इलेक्ट्रिक कारों के आयात के लिए प्रस्तावित आयात शुल्क में कटौती का मुद्दा सार्वजनिक बहस में है। जहां इस प्रस्ताव के लिए पैरवी के प्रयास जारी हैं, वहीं घरेलू आॅटोमोबाइल उद्योग इसका पुरजोर विरोध कर रहा है। टेस्ला ने 40 हजार डॉलर से कम कीमत वाली पूरी तरह से असेंबल की हुई इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क को मौजूदा 60 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत और 40 हजार डॉलर से अधिक मूल्य के वाहनों पर मौजूदा 100 प्रतिशत से 60 प्रतिशत करने की मांग की है। दिलचस्प है कि भारत में इस कार का निर्माण शुरू करने के लिए कंपनी ने कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया है। खबर है कि सरकार के कई मंत्रालयों ने भी टेस्ला के आयात शुल्क कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। आज भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग 8.2 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन कर रहा है।

विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 49 प्रतिशत इसी क्षेत्र से आता है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का 7.1 प्रतिशत है। यह क्षेत्र लगभग 3.7 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है। आज इलेक्ट्रिक वाहनों की वार्षिक कार बिक्री में हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है। हालांकि भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण पर जोर दे रही है। इसके लिए ईवी कल-पुर्जों, और घटकों, बैटरी आदि पर आयात शुल्क 10 से 15 प्रतिशत के बीच रखा गया है, जो पारंपरिक आॅटोमोबाइल कल-पुर्जों पर आयात शुल्क से काफी कम है।

इस रियायत का उपयोग करते हुए भारत की कंपनियों और स्टार्ट-अप ने देश में उत्पाद बनाना शुरू कर दिया है। भारत का लग्जरी कार बाजार अपेक्षाकृत बहुत छोटा है। आबादी का एक बहुत छोटा वर्ग ही इन लग्जरी कारों को खरीद सकता है। यदि टेस्ला को शुल्क में छूट दी जाती है, तो लग्जरी कार खरीदने में सक्षम लोग आयातित टेस्ला इलेक्ट्रिक कार ही खरीदेंगे और भारत में विनिर्माण क्षमता स्थापित करने वाली कंपनी को कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा और देश इलेक्ट्रिक वाहनों में क्षमता निर्माण से वंचित रह जाएगा। भारत ने उन वस्तुओं के, जिनके लिए देश अब तक विदेशों पर निर्भर है, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की है, जिसमें 13 सेक्टरों को शामिल किया गया है। इससे पहले चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) शुरू किया गया था। पहले पीएमपी और अब पीएलआई योजना के कारण इस क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण में कुछ बढ़ोतरी दिखनी शुरू हुई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर कस्टम ड्यूटी में कमी कंपनियों को विदेशी बाजारों से आयात करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे अर्थव्यवस्था को फायदा होने के बजाय घरेलू विनिर्माण बढ़ाने के प्रयासों को धक्का लगेगा। अभी घरेलू ऑटोमोबाइल कंपनियां और स्टार्ट-अप लगातार अनुसंधान एवं विकास और उत्पाद विकास में निवेश कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था के विकास में स्थायी योगदान दे रहे हैं।

इलेक्ट्रिक कारों के आयात के पक्ष में नीतिगत माहौल बनाने के बजाय केंद्र और राज्य सरकारों को दीर्घकालिक नीति द्वारा स्थानीय घटक पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन कर उससे लाभ उठाना चाहिए। दोपहिया उपकरण निमार्ता अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के कगार पर हैं। टैरिफ में कमी इस दिशा में भविष्य के प्रयासों को हतोत्साहित करेगी। हमें नहीं भूलना चाहिए कि टेस्ला कंपनी का बिजनेस मॉडल घरेलू आॅटो कंपोनेंट निमार्ताओं को कोई मौका ही नहीं देता है। ऐसे में, हमें असेंबल कारों पर टैरिफ कम करने के बजाय घरेलू ईवी उत्पादकों के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय समर्थन देने की आवश्यकता है।