पंकज कुमार सिंह। राष्ट्रनायक न्यूज।
मशरक (सारण)। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का खास महत्व होता है। नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां का ये स्वरूप भक्तों को सिद्धि प्रदान करता है। नवमी तिथि को घटस्थापना की तिथि यानी नवरात्रि के पहले दिन की तरह ही महत्वपूर्ण माना जाता है। नवमी के दिन मां को प्रसन्न करने के लिए विधिवत तरीके से पूजा अर्चना की जाती है। जिसके तहत गुरुवार नवमी के दिन मशरक प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पुजा पंडालों और लोगों के घरों में कन्या पूजन किया गया। कन्या पूजन के लिए कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया और नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाएं गये। इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाकर सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से से धोएं गये इसके बाद पैर छूकर आशीष लिया गया इसके बाद माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगा कर, मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराया गया ।भोजन के बाद कन्याओं को सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पैर छूकर आशीष लिया गया और हलवा पूड़ी और चने प्रसाद के रूप में खिलाया गया। आचार्य वाचस्पति तिवारी ने बताया कि मान्यता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन से प्रसन्न होकर माता रानी दुख और दरिद्रता मां दूर करती हैं। तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति रूप में मानी जाती है। त्रिमूर्ति कन्या के पूजन से धन-धान्य आता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। चार वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है। इसकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है. जबकि पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है। रोहिणी को पूजने से व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है। छह वर्ष की कन्या को कालिका रूप कहा गया है। कालिका रूप से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है। सात वर्ष की कन्या का रूप चंडिका का है। चंडिका रूप का पूजन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।


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