संजय कुमार सिंह। राष्ट्रनायक न्यूज।
बनियापुर (सारण)। सोमवार को धूम- धाम से देवोत्थान एकादशी मनाई गई। व्रतधारियों द्वारा इस दिन उपवास रहने के बाद रात में पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा में सुथनी,शक्करकंद एवं दूध-दही तथा फल से भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है। इस तिथि को तुलसी जी का विवाह शालिग्राम भगवान से हुआ था। इसलिये इसे हरि प्रवोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की भगवान विष्णु क्षीर सागर में सोने के उपरांत चार माह बाद इसी तिथि को जगते है। इसलिये इस एकादशी तिथि को शुभ फलदायी माना जाता है तथा इस दिन से मांगलिक कार्यो की शुरुआत की जाती है।पंडित बृजभूषण पाण्डेय ने बताया की इस ब्रत को करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के साथ- साथ सभी पाप कर्मो का नाश हो जाता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


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