- धान बेचने वाले किसानों को दी गई 10.24 करोड़ राशि
कशिश भारती की रिपोर्ट
छपरा()सारण)। जिले में धान की खरीदारी में तेजी लाने को लेकर जिलाधिकारी राजेश मीणा ने सभी प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी एवं पैक्सों को आवश्यक निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि धान की खरीदारी नहीं करने वाल पैक्सों के खिलाफ बिहार सहकारिता समिति अधिनियम 1935 की धारा 41 के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसबार धान की खरीदारी को लेकर पैक्सवार एवं व्यापार मंडलों के क्षेत्र के अनुसार यानी पंचायत स्तर पर भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ताकि गांव के वास्तविक किसानों से धान की खरीदारी की जा सके। जानकारी के अनुसार जिले के 724 किसानों से करीब 7777 मीट्रिक धान की खरीदारी की गई। जिसके आलोक में किसानों को अभी तक करीब 10 करोड़ 24 लाख पांच हजार 518 रूपये भुगतान किया गया है। जानकारों की माने तो अब धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, इस सूरत में अगर धान की खरीदारी में तेजी नहीं लायी गई तो धान में नमी होने के कारण खरीदारी बाधित हो सकती है। हालांकि धान की खरीदारी अभी भी गति नहीं पकड़ पाई है। किसान अपने खेतों से धान की कटनी कर खलिहानों में फसलों को रखे है। अब किसान अपने खलिहानों से अपने पैदावार को धीरे-धीरे घर ले जा रहे है। इसके साथ धान की खरीदारी को लेकर बिचौलिये भी एक्टीव हो गये है। अगर समयबद्ध तरीके से धान की खरीदारी नहीं की गई तो किसानों से बिचौलिये औने-पौन दाम पर खरीदारी कर लेंगे। जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।

डीएम ने किया चावल अधिप्राप्ति का शुभारंभ
जिले में पैक्सों द्वारा किसानों से धान की खरीदारी करने के बाद राइस मिलों से चावल तैयार कर राज्य खाद्य निगम यानी एसएफसी में सीएमआर अधिप्राप्ति यानी चावल अधिप्राप्ति की शुरूआत आनन-फानन में किया गया है। जिलाधिकारी राजेश मीणा ने सोमवार की देर शाम शहर के बाजार समिति स्थित एसएफसी के गोदाम में सीएमआर अधिप्राप्ति का शुभारंभ किया है। इस मौके पर एडीएम डॉ. गगन, डीसीओ अजय कुमार अलंकार सहित कई प्रखंडों के बीसीओ एवं पैक्स अध्यक्ष उपस्थित थे।
1940 रूपये प्रति क्विंटल हो रही धान की खरीदारी
किसानों से धान की खरीदारी के लिए सहकारिता विभाग ने 1940 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। इसी मूल्य पर जिले के किसानों से धान की खरीदारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार इस बार सामान्य किसानों से करीब 150 क्विंटल तथा बटाईदारों से करीब 50 क्विंटल तक धान की खरीदारी की जाएगी।
रजिस्ट्रेशन कराने वाले राइस मिलों का किया जा रहा भौतिक सत्यापन
जिले में प्राथमिक कृषि साख सहयोग समिति यानि पैक्सों व व्यापार मंडलों द्वारा धान की खरीदारी के बाद चावल बनाने के लिए राईस मिलों रजिस्ट्रेशन किया गया है। जिसका अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। राइस मिलों के भौतिक सत्यापन के बाद धान की खरीदारी करने वाले पैक्सों एवं व्यापार मंडलों को राइस मिलों से टैग किया जाएगा। इसके बाद किसानों से खरीदे गये धान को राइस मिल से चावल बनाकर एसएफसी गोदाम में आपूर्ति की जाएगा।
विभाग के पास धान को ड्रायर की नहीं है व्यवस्था
जिले में धीरे-धीरे ठंड का प्रभाव बढ़ने के कारण धान में भी नमी की मात्र में वृद्धि होने लगी है। विशेषज्ञों की माने तो धान में नमी की मात्रा बढ़ने से खरीदारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। अधिकारिक सूत्रों की माने तो धान में नमी को संतुलित करने के लिए जिले के पैक्सों के पास ड्रायर करने की व्यवस्था नहीं है। ताकि अधिक नमी वाले धान को ड्रायर से सुखाकर समान्य किया जा सके।
धान बेचने वाले 11426 गैर रैयत व 4369 रैयत किसानों ने धान बेचने के लिए कराया ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
जिले के किसानों को ऑन लाईन रजिस्ट्रेशन कराने वाले से ही धान की खरीदारी करने का प्रावधान किया गया है। जो किसान अपने धान की उपज को बेचना चाहेंगे उन्हें ऑनलाइन निबंधन कराना अनिवार्य है। इसको लेकर डीसीओ ने जिले के सभी प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी एवं पैक्सों को धान बेचने वाले इच्छुक किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रशन कराने का निर्देश दिया था। जिसके आलोक में अभी तक 15 हजार 795 किसानों ने धान बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, इनमें करीब 11426 गैर रैयत व 4369 रैयत किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इन किसानों से जल्द से जल्द धान अधिप्राप्ति करने का निर्देश दिया गया है।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने का क्या है नियम
ऑन लाईन रजिस्ट्रेशन में सामान्य किसानों को जमीन का भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र, जमीन का रसीद, पहचान पत्र देना है। वहीं बटाईदार किसानों को स्वघोषणा पत्र में बताना होगा कि कितनी जमीन में खेती किये है और कितना उत्पादन हुआ है। इसके साथ बटाईदार किसानों को पहचान पत्र भी देना अनिवार्य है।
एक क्विंटल धान के बदले 67 किलो चावल का होता है सप्लाई
धान अधिप्राप्ति करने के बाद पैक्स उसे चावल बनाने के लिए एसएफसी से निबंधित राइस मिलो में भेजते है। इसके बाद राइस मिलर एक क्विंटल धान के बदले में करीब 67 किलो चावल देते है। जिन्हें पैक्स राइस मिलरो के माध्यम से एसएफसी गोदाम में सप्लाई करते है।


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