छपरा(सारण)। जिले में लगातार तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है। वहीं गर्म हवाओं के थपेड़ों के कारण दोपहर में सड़क पर लोगों का चलना मुश्किल कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में गुरुवार को न्यूनत न्यूनतम तापमान 25 डिग्री व अधिकतम 41.7 डिग्री रहा। ग्रामीण इलाकों में अधिकतम पारा 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ऐसे मौसम में गर्म हवाओं के कारण लू लगने की संभावनाएं बढ़ जाती है। बढ़ते तापमान के साथ चलने वाली गर्म तेज हवाओं से
• शरीर को सुरक्षित रखना होगा। साथ है जिससे शरीर में पानी की मात्रा ही मौसम के अनुकूल शरीर को ढालने के लिए खान-पान के साथ दैनिक दिनचर्या में बदलाव करना जरुरी है। वहीं, नवजात शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं के पोषण में सेवन भी शरीर में पानी की मात्रा सुधार कर गर्मी के दुष्परिणामों से को संतुलित करने में सहायक होता 25 सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।
प्रचुर मात्रा में पानी का सेवन के साथ रसदार मौसमी फलों का सेवन जरूरी
सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएम दुबे ने कहा कि गर्मी अपने शरीर को रक्षा के लिए दैनिक बढ़ने से पसीना चलना शुरू होता दिनचर्या में भी बदलाव करना होगा। इसलिए इस मौसम में प्रचुर मात्रा में पानी का सेवन करना फायदेमंद है। इसके साथ ही रसेदार मौसमी फलों का का घोल, छाछु, है। नमक-चीनी का नींबू पानी, आम का शर्बत, लस्सी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, कच्चे प्याज सत्तु, पुदीना, सौंफ आदि का सेवन के साथ मौसमी फल भी खाना चाहिए।
इस प्रकार करें लू से बचाव
• खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलें सुपाच्य व हल्के भोजन का करें सेवन एवं खूब पानी पीयें अत्यधिक शीतल पेय पदार्थों के सेवन करने से बचें रात्रि में देर रात तक नहीं जागे कम 8 घन्टे की नींद जरूर अत्यधिक वजन वाले लोग के दिनों में वसा युक्त भोजन सेवन करने से बचें हल्के रंग के ढीले ढाले सूती कपड़े पहनें धूप के चश्मा साथ तौलिया / गमछा या छतरी का उपयोग करें खाली पैर न घूमे, जूत या चप्पल जरूर पहनें।
लू लगने के लक्षण व बचाव
डॉ. केएम दुबे ने बताया कि लू लगने के कारण मरीज को मांसपेशियों और मस्तिष्क से जुड़ी समस्या होती है। मस्तिष्क तापमान कंट्रोल नहीं कर पाता है पसीना चलना बंद हो जाता है और शरीर की गर्मी शरीर में ही रहती है। ल लगने पर शरीर को नमक व पानी की जरूरत होती है। लू लगने पर मांसपेशियों में तनाव महसूस होता है। लगे व्यक्ति को सबसे पहले ठंडे स्थान पर रखा जाना चाहिए।
मरीज यदि बेहोश नहीं है तो उसे
ओरआरएस पिलाना चाहिए। वही मरीज बेहोश हो गया है, तो नॉर्मल स्लाइन देना है। उन्होंने बताया लू लगने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श जरुरी है। ऐसे प्राथमिक उपचार के पर लू लगने पर ओआरएस का घोल पीना चाहिए ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। इसके इलाज लिए जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में पर्याप्त सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है।


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