- जिला समन्वय समिति की बैठक में रणनीति पर हुई चर्चा
- 01 से 19 साल तक के बच्चों को चिह्नित करते हुए कृमि नाशक दवा का सेवन कराएं
- सभी विभागों के परस्पर सहयोग अभियान की सफलता के लिए जरूरी
छपरा। जिले में आगामी 22 अप्रैल को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसके सफल क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी राजेश मीणा की अध्यक्षता में वीडियो कन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गयी। जिलाधिकारी ने कहा कि एक से लेकर 19 साल तक के शतप्रतिशत बच्चों को कृमिनाशक अल्बेंडाजोल दवा का सेवन कराया जाना है। कोरोना प्रोटोकोल को ध्यान में रखते हुए इसे लेकर विशेष अभियान का संचालन किया जाएगा। उन्होने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य को बढ़ावा, पोषण में सुधार व उन्हें गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यक्रम का सफल संचालन महत्वपूर्ण है। सरकारी व गैर सरकारी विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र में नामांकित व अनामांकित 01 से 19 साल तक के बच्चों को चिह्नित करते हुए कृमि नाशक दवा का सेवन कराएं। कार्यक्रम में जिले के सभी निजी व सरकारी विद्यालय बढ़-चढ़ कर अपनी सहभागिता निभायेंगे। इसके लिये माइक्रोप्लान तैयार करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस, जीविका सहित अन्य विभागों के परस्पर से सहयोग अभियान की सफलता के लिये जरूरी है। इस बैठक में उपविकास आयुक्त अमित कुमार, सिविल सर्जन डॉ. सागर दुलाल सिन्हा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. चंदेश्वर सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीपीओ आईसीडीएस, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविन्द कुमार, स्वास्थ्य जिला कार्यक्रम प्रबंधक ,जीविका जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक,एसएमओ डब्ल्यूएचओ डॉ. रंजितेश कुमार, एसएससी यूनिसेफ आरती त्रिपाठी, डीटीएल केयर इंडिया संजय कुमार विश्वास समेत सभी प्रखंडो से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम, और सीडीपीओ मौजूद थे।
माइक्रो प्लान के अनुसार दवा सेवन कराना सुनिश्चित करें:
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए त्रिस्तरीय माइक्रो प्लान बनाया जाये। जिसमें आशा, आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों को शामिल किया जायेगा। दवा खाने के बाद यदि किसी बच्चे का जी मिचलाने की शिकायत हो तो घबराने की जरूरत नहीं है। उसे तुरंत स्वच्छ पानी पिलाएं एवं बेड पर लिटा दें। लिहाजा मिचली बंद हो जाएगी। अगर विशेष दिक्कत हो तो निकट के सरकारी अस्पताल में ले जाकर डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
प्रतिकूल घटनाओं से निपटने के लिए रहें तैयार:
डीएम ने कहा कि इस दौरान कुछ बच्चों को उल्टी, जी मिचलना, दस्त और कमजोरी जैसे कुछ साइड इफेक्टस हो सकते हैं। समान्यत यह अस्थायी होते हैं इसे असानी से संभाला जा सकता है। यह दवा चबाकर खाना है। अगर किसी बच्चा असहज महसूस करते तो तुरंत उसके अभिभावक और नजदीक के चिकित्सक और एएनएम को इसकी सूचना देना चाहिए।
उम्र के अनुपात में कराया जायेगा दवा का सेवन:
- 1 से 2 वर्ष के बच्चे- आधी गोली को चूरकर स्वच्छ पानी में मिलकर चम्मच से पिलाना
- 2 से 6 वर्ष तक के बच्चे- एक पूरी गोली चूरकर पानी के साथ
- 6 से 19 वर्ष तक के बच्चे- पूरी एक गोली चबाकर पानी के साथ



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