राष्ट्रनायक न्यूज

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आपात सेवा में कार्यरत चिकित्सक सुबह 5 से 6 बजे के बीच लगाएगें उपस्थिति

  • डॉक्टरों की उपस्थिति पर विभाग की पैनी नजर
  • 104 कॉल सेंटर से किया जाएगा अनुश्रवण
  • रियल टाइम लोकेशन भी चल सकेगा पता

छपरा   जिले में एईएस तथा अतिगंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों की देख-रेख के लिए विभाग डॉक्टरों की उपस्थिति पर पैनी नजर रख रहा है। जिलास्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक के अस्पतालों में आपातकालीन सेवा में कार्यरत चिकित्सकों को अब दर्पण प्लस एप के जरिए सुबह 5 से छह बजे के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। दर्पण एप पर उपस्थिति की सेवा का आदेश कार्यपालक निदेशक ने पत्र लिख कर जारी किया है। जिसका पालन जिले में शुरू हो चुका है। यह फैसला एईएस तथा अतिगंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों के उपचार के लिए लाभकारी होगा। जिस एप के जरिए आपातकालीन सेवा के चिकित्सक अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे उसमें उनकी रियल टाइम लोकेशन भी दिखेगा। इस सेवा के शुरू होने से डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। प्रत्येक प्रखंड स्तरीय सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोस्टर के अनुसार चिकित्सकों और पारामेडिकल स्टॉफ की ड्यूटी लगी हुई है। जिससे किसी भी वक्त एईएस मरीजों को चिकित्सकीय सहायता मिल सके।  सभी डॉक्टरों को रोस्टर अनुसार निदेशित है कि दर्पण प्लस एप पर ससमय उपस्थिति दर्ज करना सुनिश्चित करें।

स्वास्थ्य संस्थानों में 24X7 स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाना अत्यन्त ही आवश्यक:

सिविल सर्जन डॉ. सागर दुलाल सिन्हा ने कहा कि एईएस प्रभावित जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में 24X7 स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाना अत्यन्त ही आवश्यक है। ताकि उक्त रोग से ग्रसित मरीजों को ससमय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करायी जा सके। अब अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की उपस्थिति सुबह 05:00 से 06:00 बजे तक दर्पण प्लस  एप के माध्यम से दर्ज करने का निदेश दिया गया है। जिले के सभी पीएचसी में जेई/एईएस से बचाव हेतु सभी आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। आवश्यक दवाओं के साथ-साथ पैरासिटामोल, ओआरएस, विटामिन ए सहित ग्लूकोज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

समय पर इलाज करना जरूरी :

 गंभीर बीमारी चमकी से पीड़ित बच्चों को समय पर इलाज किया जाए तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाते है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी थीम चमकी की धमकी रखा गया है। इसमें तीन धमकियों को याद रखने की जरूरत है। जिसमें पहली यह है कि बच्चों को रात में सोने से पहले खाना जरूर खिलाएं। इसके बाद सुबह उठते ही बच्चों को भी जगाएं और देखें कि बच्चा कहीं बेहोश या उसे चमकी तो नहीं है।

चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण :

  • लगातार तेज बुखार रहना।
  • बदन में लगातार ऐंठन होना।
  • दांत पर दांत दबाए रहना।
  • सुस्ती चढ़ना।
  • कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
  • चिउटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।

चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी :

  • बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
  • गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
  • ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
  • रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
  • बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
  • पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।