- मरीजों को नियमित दवा सेवन और विशेष ध्यान देने के लिए करेंगे प्रेरित
- टीबी के मरीजों से भी ली जा रही सहमति पत्र
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरू की है पहल
राष्ट्रनायक न्यूज।
छपरा (सारण)। अब कोई भी व्यक्ति टीबी मरीज को गोद ले सकता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक लोगों के आवेदन पर मरीज को गोद दिया जाएगा। वे लोग मरीजों को नियमित दवा लेने और सेहत का विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित करेंगे। जब मरीज की सेहत बेहतर हो जाएगी तो गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टीबी रोगी को बीमारी से मुक्त कराने के लिए कोई भी नागरिक उसे गोद ले सकता है। इसमें संबंधित व्यक्ति को अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर या पेशा के बारे में ब्यौरा देना होगा। इसके बाद विभाग की ओर से मरीज को गोद दिया जाएगा। गोद लेने वाले व्यक्ति को मरीज के बारे में और उसका नाम किसी को शेयर नहीं करना होगा। वह उसकी देखभाल के साथ ही मदद भी कर सकता है। इसके लिए टीबी के मरीजों से भी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सहमति पत्र लिया जा रहा है कि वे किसी से मदद लेना चाहते हैं या नहीं। कई मरीजों ने इस योजना का लाभ लेने के लिए सहमति भी जाहिर की है।
अडॉप्ट पीपल विद टीबी है योजना का नाम:
भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी यानी तपेदिक या क्षय रोग से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार टीबी मरीज को गोद लेने की पहल की शुरुआत करने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब क्षय रोग से पीड़ित लोगों को गोद लेने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत कोई भी स्वयंसेवी संस्था, औद्योगिक इकाई या संगठन, राजनीतिक दल या कोई व्यक्ति टीबी के मरीज को गोद ले सकेगा, ताकि वह उसका समुचित इलाज करा सके. इस योजना को अडॉप्ट पीपल विद टीबी कहा गया है।
टीबी मरीजों से भावनात्मक संबंध बनाया जाना महत्वपूर्ण:
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि टीबी रोगियों को गोद लेकर उनकी सहायता कई तरीके से की जा सकती है। सबसे पहले टीबी मरीजों से भावनात्मक संबंध बनाया जाना महत्वपूर्ण है। टीबी मरीज को यह विश्वास दिलाएं कि नियमित दवा सेवन से वे जल्द ठीक हो सकते हैं। दवा सेवन के प्रति लापरवाही बरतने से टीबी गंभीर हो जायेगा। टीबी के लक्षणों में सबसे प्रमुख खांसी है जो लंबे समय तक चलती है। 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहता है.। खांसी के साथ खून आता है। ऐसे लक्षणों वाले व्यक्ति को टीबी जांच की सलाह दें तथा उन्हें अस्पताल ले जाने में मदद करें। सामाजिक दायित्व के तहत मरीजों को अस्पताल आने जाने, इलाज और खानपान का खर्च उठा सकते हैं। टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित करें तथा आवश्यक पड़ने पर उनके लिए आहार का प्रबंधन करें। बेहतर खानपान के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली 500 राशि दिलाने में मदद करें।


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