राष्ट्रनायक न्यूज

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एमटीपी एक्ट 1971  के प्रावधानों के अनुसार गर्भपात कानूनी रूप से वैध

  • घरेलू उपायों से गर्भ समापन करना खतरनाक, हो सकती महिलाओं की मृत्यु
  • आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को दी गयी सुरक्षित गर्भपात की जानकारी
  • अविवाहित महिलाओं को भी गर्भ समापन की सुविधा

राष्ट्रनायक न्यूज।

छपरा (सारण)1971 से पूर्व किसी भी प्रकार का गर्भ समापन अवैध माना जाता था। गर्भ समापन के लिए बड़ी कठिनाइयां होती थी। अनेक तरह के घरेलू उपायों से गर्भ समापन करने को प्रक्रिया में महिलाओं की मृत्यु हो जाती थी। उसे रोकने के लिए 1971 में एमटीपी एक्ट बना। इसके बाद से सुरक्षित गर्भ समापन की प्रक्रिया शुरू हुई। अज्ञानता के कारण तथा सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को मृत्यु दर में कमी नहीं हो रही थी। उन्होंने बताया कि 1971 के प्रावधानों के अनुसार गर्भ समापन कई शर्तों के साथ वैध माना गया। लेकिन इससे भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा था। इसलिए एमटीपी एक्ट में संशोधन किया गया। जिससे 20 सप्ताह तक अब 24 सप्ताह तक के गर्भ को शर्तों के अनुसार समापन कराया जा सकता है। इसको लेकर जिले के रिविलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें  48 आशा कार्यकर्ता, 3 फैसिलिटेटर और 19 एएनएम के साथ  सांझा प्रयास नेटवर्क एवं  आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के माध्यम से चलाए जा रहे सुरक्षित गर्भ समापन पर  जानकारी दी गयी। इस दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राकेश कुमार, बीसीएम रितु कुमारी, स्वास्थ्य प्रबंधक राकेश कुमार सिंह मौजूद थे।

अविवाहित महिलाओं को भी गर्भ समापन की सुविधा:

आईपास के जिला समन्वयक अभिरंजन ने बताया कि पर्याप्त भ्रूण विकृति के मामलों में गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भ समापन को मान्य किया गया है। किसी भी महिला या उसके साथी के द्वारा प्रयोग किए गए गर्भनिरोधक तरीके की विफलता की स्थिति में अविवाहित महिलाओं को भी गर्भ समापन सेवाएं दी जा सकेंगी। उन्होंने बताया कि 20 सप्ताह तक एमटीपी के लिए एक आरएमपी और 20 से 24 सप्ताह के लिए दो आर एम पी की राय चाहिए। इतना ही नहीं, गोपनीयता को कड़ाई से बनाए रखा जाना आवश्यक है।

ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को जागरूक करना ज़रूरी:

सुरक्षित गर्भपात कानूनी तौर पर पूरी तरह से वैध है। इस बात की जानकारी आज भी  ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को नहीं है। जिसके कारण वो गांव- देहात के नीम- हकीम और झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में पड़कर अपने प्राण तक गंवा रही हैं। सुरक्षित गर्भपात के बारे में ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को जागरूक करना ज़रूरी है।  20 सप्ताह तक गर्भ समापन कराना वैध है। सदर अस्पताल या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में ही प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में सुरक्षित गर्भपात कराया जाना चाहिए।