- बारिश के अभाव में खराब हुई मक्के की फसल
- कर्ज की भरपाई कैसे होगी कि लेकर किसान परेशान
संजय कुमार सिंह। राष्ट्रनायक न्यूज।
बनियापुर (सारण)। काफी खर्च और कड़ी मेहनत के बाद भी मक्के का उत्पादन औसत से कम होने से किसानो को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। किसानो का कहना है की जुलाई महीने की शुरुआत से ही बारिश की रफ़्तार काफी धीमी होने की वजह से मक्के के भुट्टो में आशा के अनुरूप दाना नहीं निकलने और समय से पूर्व ही पौधों के सूखने की वजह से दाने पुष्ट नहीं होने से उत्पादन पर ब्यापक पैमाने पर असर पड़ा है। ज्यादातर वालियों में दाने ही नहीं लगे और लगे भी तो औसत से कम जो किसानों के लिये परेशानी का सबब बना है। अक्टूबर महीने में थोड़ी- बहुत बारिश भी हुई तबतक मक्के की फसल तैयार हो चुके थे। ऐसे में इस बारिश से मक्के के फसल को कोई लाभ नही मिल सका।
लागत खर्च भी निकालना हुआ मुश्किल:
किसानो का कहना है की फसल के उत्पादन को देख लागत खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है। आम तौर पर मक्के की उपज प्रतकट्ठा 60-80 किलोग्राम होता है जो इस बार महज 15-20 किलो ही हो रहा है। शुरूआती दौर में ही मौसम के दगा देने के कारण अच्छी उपज नही हो सकी।महंगे दाम पर खरीदे गये हायब्रिड बीज और उर्वरक का उपयोग करने के बाद भी उपज कम होने से किसान अपने को असहज महशुस कर रहे है। सबसे ज्यादा परेशानी लघु एवं सीमांत किसानो को उठानी पर रही जो पट्टे पर या होंडा(एक निश्चित रकम चुकाने) की शर्त पर बड़े किसानो से भूमि लेकर खेती- बाड़ी का कार्य करते है। कृषि कार्य के लिये ली गई कर्ज की अदायगी कैसे होगी और आगामी रवि फसल के लिये पूंजी का प्रबंध कहाँ से होगी को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच गई है।
फ़ोटो(बगैर भुट्टे लगे मक्के के पौधों को दिखाता किसान):


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