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नई शिक्षा नीति में पूंजीपतियों को रखा गया ख्याल, आम गरीब छात्रों को शिक्षा से वंचित करने की हुई साजिश: एआईएसएफ

नई शिक्षा नीति में पूंजीपतियों को रखा गया ख्याल, आम गरीब छात्रों को शिक्षा से वंचित करने की हुई साजिश: एआईएसएफ

  • एआईएसएफ ने आम गरीब छात्रों के हित में जल्द समान शिक्षा प्रणाली लागू करने का किया मांग

छपरा(सारण)। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) सारण जिला इकाई की ओर से राज्य उपाध्यक्ष राहुल कुमार यादव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक के शिक्षा का व्यवसायीकरण, निजीकरण एवं शिक्षा के मौलिक अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। नई शिक्षा नीति आम गरीबों को शिक्षा से वंचित करने की नीति है। हम एआईएसएफ के लोग आम गरीब छात्रों के हित में लगातार माँग करते रहे हैं कि शिक्षा पर बजट का दसवां हिस्सा खर्च हो और देश के अंदर समान शिक्षा प्रणाली लागू हो। अपने नारों “राष्ट्रपति हो या भंगी की संतान सबको शिक्षा एक समान” के साथ एआईएसएफ के साथी संघर्षरत हैं। हम चाहते हैं चाहे वह अमीर का बच्चा हो हो या गरीब का सबों को एक समान शिक्षा मिलनी चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार की यह नई शिक्षा नीति 2020 बिल्कुल इसके विपरीत है। इसलिए हम सभी इस गरीब विरोधी नई शिक्षा नीति 2020 का विरोध करते हैं।
राज्य उपाध्यक्ष ने कहा कि इस शिक्षा नीति में पूंजीपतियों का पूरा ख्याल रखा गया है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की अपेक्षा की गई है। इस नई शिक्षा नीति में 10 से 12 किलोमीटर के घेरे में एक मॉडल स्कूल बनाने की योजना है, अगर ऐसा होता है तो बाकी के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम हो जाएगी। उच्च शिक्षा में आम जनों को कोई स्थान नहीं दिया गया है। विदेशी निवेश की रास्ता को साफ किया गया है। ऐसी व्यवस्था में बड़े घरों के बच्चे हीं उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। आम गरीबों के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। क्योंकि बाहरी निवेश के कारण शिक्षा और महंगी हो जाएगी। नई शिक्षा नीति से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को योजना आयोग के तर्ज पर हीं समाप्त कर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त कर दी गई है। शिक्षा के जनतांत्रिक चरित्र को समाप्त कर सत्ता केंद्रित अधिकारों का केंद्रीकरण कर दिया गया है। अभी तक भारत के संविधान में शिक्षा समवर्ती सूची में रहने के कारण राज्य का विषय था। लेकिन केंद्र सरकार राज्य की संवैधानिक, स्वायत्तता का अपहरण कर रही है। कोठारी आयोग द्वारा अनुशंसित शिक्षा पर राष्ट्रीय आय का 6% अभी तक केंद्र की सरकार व्यय करने का राजनीतिक इच्छा शक्ति नहीं दिखा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों को समाज कल्याण विभाग से हटाकर शिक्षा मंत्रालय के अधीन इसलिए लाया गया है कि आंगनबाड़ी के लिए आवंटित बजट को जोड़कर 6% व्यय करने का धूर्ततापूर्ण लक्ष्य हासिल हो सके। जब तक समान शिक्षा प्रणाली लागू नहीं की जाएगी तब तक न तो सबों को शिक्षा मिल पाएगी और ना कभी हमारा देश ज्ञान की शक्ति ही बन पाएगा। हम सरकार से मांग करते हैं कि जल्द देश भर में समान शिक्षा प्रणाली लागू किया जाए।