राष्ट्रनायक न्यूज

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साधारण मनुष्यभी बन सकता है राम जैसा मर्यादा पुरुषोत्तम : रामप्रवेश सिंह जी

साधारण मनुष्यभी बन सकता है राम जैसा मर्यादा पुरुषोत्तम : रामप्रवेश सिंह उर्फ राय जी

बिपीन कुमार। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।

दरियापुर (सारण)। सामाजिक सेवक रामप्रवेश सिंह उर्फ राय जी ने भगवान राम के मर्यादा पुरुषोत्तम होने पर प्रकाश डाला भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहलाए? नवरत्न मंदिर प्रांगण मे इसका व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम समस्त मानवों,सुर,असुरों के मर्यादाओ का ख्याल रखेते थे।उनके पास ब्रम्हास्त्र भीं था लेकिन न खुद प्रयोग करना चाहते थे न अपने अनुज लक्ष्मण को ऐसा करने को बोलते थे, क्योंकि ब्रम्हास्त्र की मर्यादा की बात थी।समस्त मायावी शक्तियों के स्वामी थे लेकिन इन्द्रजीत जैसे असुर के नाग फाॅस मे बॅध मर्यादा की रक्षा की।स्वयम् जगत नियंता थे सीता हरण होगा जानते थे तभीं वास्तविक सीता को अग्नी को समर्पित कर काल्पनिक सीता बनाये लेकिन विधि के विधान को नही बदले और विधि के मर्यादा की रक्षा की।अयोध्या मे घटित होने वाले घटनाओ का ज्ञान था लेकिन विधि के विधान को रोके नहीं जैसा विधि ने चाहा वैसा ही होने दिया।स्वयम् अयोध्या के राजा थे लेकिन जनता के मर्यादा की रक्षा व प्रसन्नता हेतु जगत जननी सीता को त्याग कर राज धर्म का निर्वहण करते हुए राजा के मर्यादा की रक्षा की।जब जगत जननी सीता धरती मे प्रवेश करने लगी तब धरती माॅ को रोके नही और उनकी भी मर्यादा बॅचा लिए ।आजीवन खुद दर्द सहन करते रहे लेकिन किसी को दर्द नहीं दिया।अत्याचार व अपराध को नहीं सहे लेकिन अत्याचारी व अपराधियों को भी सुधरने का मौका दिया और अनुपम सहनशीलता का परिचय देकर धैर्य व क्षमा के मर्यादा की भी रक्षा की।जब उनको मृत्युलोक छोडने हेतु महाकाल मिलकर अनुरोध करने आये तो उनके मर्यादा की भीं रक्षा अंतिम समय मे की और सभीं गणों व शेषनाग स्वरूपी लक्ष्मण जी के साॅथ वैकुंठ चल दिए।लेकिन महाबीर हनुमानजी को धरती पर रहने का आदेश दिया क्योंकि घोर कलियुग मे मानवता की रक्षा महाबीर हनुमानजी के जिम्मे हीं है। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को कम से कम 11 दीपक भगवान श्रीराम के नाम से जलाने से उनकी कृपा प्राप्त होगी साॅथ ही दो दीपक हनुमान जी के नाम से भी जलाने की अपील करते हुए कहा की कलयुग मे धरती पर विराजमान महाबली हनुमान जी रूद्र के अवतार है उनके पूजा से सभीं देव व नवग्रह प्रसन्न हो जाते है। अंत मे उन्होने कहा कि सामान्य मनुष्य भीं सभीं के मर्यादाओ का ख्याल रख श्रीराम चरित मानस से शिक्षा ग्रहण कर मर्यादा पुरुषोत्तम राम जैसा सुविख्यात हो अपना नाम अमर कर सकता है। युगों युगों तक श्रीराम जैसा उसका नाम भीं अमर हो सकता है।