भारत छोड़ो आंदोलन के आगाज में अमनौर के जय मंगल महतो जान गवाकर अंग्रेजो से गांव की रक्षा किया था
- शहीद जयमंगल महतो का शहादत दिवस मनाई गई
अमनौर(सारण)। प्रखंड के वैष्णव देवी गुफा मंदिर परिसर में गुरुवार को अमनौर निवासी वीर विभूति जय मंगल महतो का शहादत दिवस मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य अम्बिका राय ने किया। बीडीओ विभू विवेक व थाना अध्यक्ष विश्व मोहन राम ने शहीद जय मंगल महतो के तैल चित्रों पर श्रद्धा सुमन अर्पित श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस दौरान अम्बिका राय ने कहा कि यह धरती आज स्वतंत्र है, वीरो की कुर्बानी, मुखिया प्रतिनिधि सह राजद के जिला महासचिव विजय कुमार विधार्थी ने कहा कि आजादी के लड़ाई में जय मंगल महतो का महत्पूर्ण भूमिका रहा है। भाजपा नेता अभिषेक कुमार सिंह ने शहीद जयमंगल महतो के नाम पर हाई स्कूल या चौक का नाम जय मंगल महतो अंकित करने की मांग किया। उक्त अवसर पर प्रो शांति भूषण प्रसाद, जदयू अध्यक्ष राज कुमार कुशवाहा,शिक्षक शशिकांत, मेघनाथ प्रसाद, पिंटू कुमार, भाजपा नेता अभिषेक कुमार सिंह, शिक्षक पप्पू सिंह, कुंदन कुमार, शिक्षक बिनोद कुमार, विनय महतो समेत दर्जनों शिक्षाविद उपस्थित थे।
जय मंगल महतो ने अकेले तीर-कमान से कई अंग्रेजो को घायल कर स्वयं वीरगति को प्राप्त किये थे
आठ अगस्त के दिन भारतीय इतिहास में आजादी के अंतिम लड़ाई के शंखनाद के रूप में याद किया जाता है। इस लड़ाई में शहीद जयमंगल महतो व बहुरिया राम स्वरूपा देवी का भी बहुत महत्पूर्ण योगदान रहा है। बापू द्वारा चलाया गया भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 18 अगस्त 1942 के दिन मढौरा के निकट आम के बगीचे में कांग्रेस नेत्री रामस्वरूपा देवी की अध्यक्षता में सुरभि सभा का आयोजन हुआ। सभा मे लगभग 20 लोग शामिल हुए थे। इस दौरान अंग्रेज सिपाही आ धमके और ताबरतोड़ गोलियां चलाने लगे। सभा मे आये लोग भी बिना भय के अंग्रेजो पर टूट पड़े। अंग्रेजो को पिछा कर महता गाच्छी के पास सात गोरे को मारकर अगस्त के भीषण वर्षा में गण्डकी नदी में प्रवाहित कर दिया। अपने सिपाहियों की मौत से आक्रोशित अंग्रेज 20 अगस्त को अमनौर आकर चारो तरफ से घेरने की कोशिश कर रहे थे। इसके पूर्व ही लोगों ने मही नदी पर बनी पुल को ध्वस्त कर दिए थे। इसके बावजूद भी अंग्रेज नदी के पानी में चलकर पार आना चाह रहे थे। सभी लोग भय से घर छोड़ भाग गए थे। अंग्रेजो को आते देख जयमंगल महतो अपने आप को रोक नही पाए। तीर कमान लेकर अंग्रेजो पर टूट परे। जिससे कई अंग्रेज घायल हो गए थे। अंत मे अंग्रेजी सिपाही ने इन्हें अपने निशाने पर लेकर गोली दाग दिया। जिससे वे देश के लिए वही वीरगति को प्राप्त हो गए। इस तरह इन्होंने अपने जान गवाकर गांव की रक्षा किया था।
दाने-दाने के माेहताज है शहीद जयमंगल महतो का परिवार
देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शहीद जयमंगल महतो का परिवार आज दाने-दाने के लिए माेहताज है। अमनौर चौक के उत्तर दिशा में इनका घर है। परिजन फल, सब्जी, अंडा आदी खुदरा में बेचकर अपने बाल बच्चो का लालन पालन करते थे । मालूम हो कि जयमंगल महतो की वीरगति से सभी अनजान थे। पूर्व प्राचार्य अम्बिका राय के पहल पर शहीद जयमंगल महतो का शहादत दिवस अमनौर मनाया जाने लगा।


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