कोरोना से मरे लोगों, डाक्टरों की आंकड़ा सरकार के पास नहीं, हो रही है लोकतंत्र से मजाक: मुरारी बाबा
राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
गड़खा (सारण)। कोरोना के दौरान देशवासियों पर जो व्यतीत हुई हैं।चाहकर भी कोई भूल नहीं सकता।सरकारी सहायता व संसाधन के अभाव में कई लोगों ने जान गवाई।देश की सेवा करते करते कितने डॉक्टर खुद काल के गाल में समा गए।परन्तु सरकार के पास इसकी डाटा उपलब्ध नही है। यह बहुत ही आश्चर्य का विषय है। संसद में यह जानकारी दी गई है कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों और कोरोना से सुरक्षित समाज बनाने में जुटे डॉक्टर,स्वास्थ्य कर्मी,सफाई कर्मी पुलिस समेत अन्य कोरोना वॉरियर्स की मौतों का कोई आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। कोरोना वॉरियर्स अपनी जान व परिवार की परवाह न करते हुए संकट के इस दौर में तन-मन से बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। राष्ट्र के उत्थान में सहायक मजदूरों व कोरोना वॉरियर्स के प्रति यह संवेदनहीनता क्या निष्ठुरता की पराकाष्ठा नहीं है? जनता की सरकार का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया खलने वाला है। वह चाहे, तो एक-एक मौत का आंकड़ा जमा कर सकती है, फिर भी वह मौन है। संसद में जिस प्रकार की जानकारी दी गई है, क्या वह जनता और लोकतंत्र का मजाक नहीं है?जनता से यह मजाक सरकार को भारी पड़ सकती हैं?


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