यहां तो संत की एक आवाज सुन सैकड़ों काग भुसुंडि भोजन करने मंदिर में पहुंचते हैं

छपरा (संजय पांडेय/वीरेश सिंह)। कहते हैं कि खग की भाषा खग और मनुष्य की भाषा मनुष्य ही समझते हैं। लेकिन मनुष्य की भाषा पक्षी को समझने और उस पर अमल करते हुए अक्सर कम ही लोगों को देखने व सुनने को मिलती है। कुछ ऐसा ही नजारा मांझी के सरयू नदी के पावन तट पर स्थित रामघाट स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर परिसर में देखने को शुक्रवार को मिली। जहां एक संत की आवाज पर एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में काग भुसुंडि की टोली अर्थात कौओं की टोली भोजन ग्रहण करने के लिए आसमान से फर्राटे भरते हुए उक्त परिसर में पधारे। जिसे देख लोग आश्चर्यचकित हो गए। इस मनोरम दृश्य को देख आम जनमानस भाव विभोर हो गए। यह नजारा उस वक्त देखने को मिला जब सारण निकाय के भावी एमएलसी प्रत्याशी सुधांशू रंजन का 33 वां जनमोत्स्व मंदिर परिसर में मनाया जा रहा था। तब मंदिर के एक संत प्रहलाद दास जी ने हाथ में खीर की थाली लिए आकाश में कौवों की टोली को काग भुसुण्डि सीताराम-सीताराम भोजन के लिए पधारें की आवाज लगाई। जिसे सुन कर काग भुसुण्डि की टोली देखते ही देखते सैकड़ो की तादात में कांव-कांव करते मंदिर परिसर में झुंड सहित पहुंच गए। कुछ ही देर में अपना भोजन ग्रहण कर सभी आकाश में फुर्र भी हो गए।

इस हैरत अंगेज क्षण को देख लोग मंद-मंद मुस्कुराने लगे। इस संबंध में पूछे जाने पर संत ने बताया कि यह पक्षी आज ही नहीं, बल्कि इन्हें प्रति दिन करीब दिन के दो बजे भोजन के लिए बुलाया जाता है। जो मेरी सीताराम सीताराम की एक आवाज सुन सीधे मंदिर परिसर में पहुँच जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे बचपन से ही पक्षियों से अपार प्रेम व स्नेह रहा है। जब इनको हम अपने हाथों से भोजन कराते हैं, तब खुशी की अनुभूति देख मेरी अंतरात्मा तृप्त हो जाती है।


More Stories
मुख्यमंत्री का अमर्यादित हरकत और शर्मनाक समर्थन
छपरा सदर प्रखंड के महाराजगंज पंचायत भवन में होगा विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन
प्रत्येक गुरुवार को जिलाधिकारी उद्यमियों के साथ करेंगे संवाद, उनकी समस्याओं को दूर करने के लिये एवं उद्यम विकास के लिये किया जायेगा सक्रिय सहयोग