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अररिया: मजबूत इच्छाशक्ति व संयमित जीवन शैली से दी कोरोना को मात

मजबूत इच्छाशक्ति व संयमित जीवन शैली से दी कोरोना को मात

अररिया। कोरोना संक्रमण हमें संयमित जीवनशैली व नियमित दिनचर्या की सीख देता है. संक्रमण अभी कम नहीं हुआ है. हम कभी भी और कहीं भी संक्रमण का शिकार हो सकते हैं. इसलिये ये सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम इससे बचाव के तमाम उपायों का शत-प्रतिशत अनुपालन करें. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करें. कोरोना संक्रमण से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए ये बातें 55 वर्षीय शिक्षका किरण झा ने कही. जो हाल ही में कोरोना संक्रमण को मात देकर फिर से अपने जिम्मेदारियों के निर्वहन में जुट चुकी हैं.

शुरू में घर के छोटे बच्चों के सेहत की थी चिंता
फॉरबिसगंज बाल मध्य विद्यालय की शिक्षिका किरण अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि सर्दी खांसी की शिकायत होने पर बिना देर किये उन्होंने कोरोना जांच को तरजीह दी. रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद उन्होंने घर पर ही खुद को आइसोलेट करने का निर्णय लिया. शुरूआत में तो घर के अन्य सदस्य खास कर छोटे बच्चों की सेहत को लेकर काफी चिंता हुई. लेकिन रोग से उबरने में परिवार वालों का काफी साथ मिला. इस कारण धीरे-धीरे सारी चिंताएं खत्म होते चली गयी. संक्रमित होने के बाद उन्होंने खुद को अपने घर में ही आइसोलेट करने का निर्णय लिया. परिवार के सदस्य पहले से ही स्वास्थ्य सेवा से जुड़े थे. तो रोग से बचाव व इससे निजाद के उपायों को लेकर मन मे किसी प्रकार का कोई भ्रम पहले से ही नहीं था.

मुश्किल दौर में थामा धैर्य व संयम का दामन
क्वारेंटाइन के शुरूआती एक दो दिन काफी मुश्किल से गुजरा. आंखों से नींद पूरी तरह गायब थी. तो मन पूरी तरह बेचैन था. लेकिन दौरान परिवार के लोगों का भरपूर साथ मिला. इस कारण धीरे धीरे अपनी मनस्थिति पर नियंत्रण स्थापित करने आसान होता गया. उस मुश्किल वक्त को याद करते हुए किरण बताती है कि घर में रह कर घर वालों से दूरी बनाये रखना बेहद मुश्किल व चुनौती भरा काम होता है. लेकिन अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिहाज से इसे जरूरी मानते हुए उन्होंने सख्ती पूर्वक इसका अनुपालन किया. परिवार के लोग आते तो कमरा के दरवाजे से ही हाल-चाल पूछते, खान-पान के समान कमरे के बाहर रख दिये जाते थे. वो दौर मुश्किलों से भरा था. इसलिये उन्होंने इस दौरान धैर्य व संयम का दामन मजबूती से थामे रखा.

नियमित योगाभ्यास से संक्रमण से उबरने में मिली मदद
किरण कहती हैं कि एक-दो दिन बाद वो खुद को अपने कामों में व्यस्त रखने लगी. ताकि किसी तरह के नाकारत्मक विचारों से खुद को बचाया जा सके. इससे मेरे आत्मविस्वाश में काफी इजाफा हुआ. खुद को व्यस्त रखने के लिये सुबह शाम नियमित योगाभ्यास करने लगी. इसके अलावा संयमित दिनचर्या, संतुलित ताजा भोजन के सेवन को वरीयता देने के साथ साथ नियमित रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ के सेवन से कम समय में संक्रमण से उबरने में मदद मिली.

सोसाइटी के लोगों को अब कर रही हैं जागरूक
कम समय में संक्रमण से उबरने का फायदा ये हुआ कि किरण चुनाव संबंधी अपनी जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक निर्वहन कर सकीं. किरण कहती है कि संक्रमण से उबरने के बाद वह सोसाइटी की अन्य महिलाओं को संक्रमण से बचाव व इससे उबरने के तौर तरीकों को लेकर लगातार जागरूक कर रही हैं. संक्रमण के दौर से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र कर उन्हें इससे अपना बचाव करने के लिये प्रेरित कर रही हैं. इसका फायदा ये हुआ है कि अब सोसाइटी की महिला ही नहीं पुरुष व छोटे बच्चे भी नियमित रूप से मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी के साथ-साथ संयमित खान-पान का ध्यान रखने लगे हैं. जो आज के दौर में संक्रमण से बचाव का एक मात्र कारगर उपाय है. लोगों के व्यवहार में इस तरह की तब्दीली को देखकर बेहद खुश होने की बात किरण कहती है.