राष्ट्रनायक न्यूज

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भारी वाहनों के परिचालन से एसएच 104 हो रहा जर्जर

भारी वाहनों के परिचालन से एसएच 104 हो रहा जर्जर

  • एनएच 19 पर स्थित पट्टी पुल के कारण भारी गाड़ियों का रूट हुआ डायवर्ट
  • सरकार के अदूरदर्शिता पर उठ रहे सवाल?

अनुज प्रतिक की रिर्पोट। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।

दिघवारा (सारण) बताते चले कि छपरा सोनपुर एन एच 19 पर सदियों पुराना पट्टीपुल के कमजोर होने की बात लम्बे समय से सामने आती रही है। जिसके बाद से ही विगत कई वर्षों  से जिला प्रशासन के आदेशानुसार उक्त पुल पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित होने की बात भी सामने आती रही है। इसी बीच वर्ष 2018 में लाखों रुपए खर्च करके उक्त पुल के सुपर स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण भी हुआ, इसके बावजूद भी पुल के कमजोर खम्बों का हवाला देकर जिला प्रशासन ने  इस पुल पर मालवाहक ट्रकों सहित भारी वाहनों पर परिचालन पर 15 जून 2019 से रोक लगा दिया। और इसके सख्ती से पालन हेतु बाजाब्ता बैरियर लगा कर पुल के दोनों ओर होमगार्ड के जवानों की तैनाती भी की गई। और जिला प्रशासन के इसी अदूरदर्शिता का खामियाजा एसएच 104 को उठाना पड़ा। होमगार्ड्स के द्वारा सितलपुर से दिघवारा आने जाने वाले भारी वाहनों के रूट को डायवर्ट कर दिघवारा भेल्दी मुख्य मार्ग एसएच 104 पर भेजा जाने लगा। जिसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2017 में 44 करोड़ की लागत से बनी सड़क पूरी तरह से जर्जर हो गया।

जानकर बताते हैं कि एन एच की तुलना में एसएच की सड़कों का भार वहन क्षमता अलग अलग होती है। लिहाजा पट्टी पुल पर बड़े वाहनों के परिचालन बन्द होने एवं रूट डायवर्ट होने के कारण बड़े पैमाने पर भारी एवं मालवाहक ओवरलोड गाड़ियों का परिचालन एस एक 104 पर होने लगा लिहाजा लाखों में बने पुल को बचाने के चक्कर में करोड़ों में बना सड़क जर्जर हो गया। और यही कारण है कि सरकारी अदूरदर्शिता की बात लोगों के जेहन में कई सवाल पैदा करता है।

सवाल यह भी उठता है कि क्या पट्टीपुल को बचाने के लिए एसएच 104 पर रूट डायवर्ट करना उचित था?  क्या पट्टीपुल का दूसरा कोई बेहतर विकल्प नहीं हो सकता है? क्या पट्टीपुल के बगल में बन रहे फोरलेन पुल को जल्दी बनाकर एसएच 104  और पट्टीपुल दोनों को बचाया जा सकता था? पट्टीपुल के सुपर स्ट्रक्चर को बदलने के बाद भी अगर पुल कामयाब नहीं हुआ तो पुल की मरम्मती के बजाए नए पुल का निर्माण क्यो नहीं किया गया। और रुत डायवर्ट होने के कारण मालवाहक गाड़ियों के ऊपर टॉल का जो अतरीरिक्त बोझ बढ़ने के साथ ही दो किलोमीटर की दूरी के जगह पर बीस किलोमीटर अतरीरिक्त ईंधन व्यय का जिम्मेदार कौन है।