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वैश्विक महामारी ने व्यैक्तिगत शुद्धता के साथ-साथ हमें पर्यावरण की शुद्धता के महत्व को समझाया

वैश्विक महामारी ने व्यैक्तिगत शुद्धता के साथ-साथ हमें पर्यावरण की शुद्धता के महत्व को समझाया

दूषित पर्यावरण वाले इलाकों में कोरोना संक्रमण का दिखा ज्यादा असर, अधिक प्रभावित हुए लोग
पर्यावरण प्रदूषण के मामलों में कमी लाने के लिये सामूहिक व संस्थागत प्रयास की है जरूरत

अररिया। पर्यावरण प्रदुषण मानव जीवन के लिये गंभीर चुनौती है. वैश्विक महामारी के इस दौर में पर्यावरण शुद्धता से जुड़ा मामला पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो चुका है. लॉकडाउन के दौरान आम लोगों को भले थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा हो लेकिन पर्यावरण से जुड़े कई साकारात्मक पहलू भी हमें इस दौरान देखने को मिले. पूरी दुनिया में प्रदूषण के स्तर में जहां कमी आयी. वहीं वायु शुद्धता के स्तर में भी काफी सुधार देखा गया. कोरोना संकट के इस दौर ने जहां हमें व्यैक्तिगत शुद्धता के महत्व को समझाया वहीं पर्यावरण से जुड़े मामलों की महत्ता को समझाने में भी ये बहुत हद तक कामयाब रहा. दूषित पर्यावरण हमारे जीवन जीने के अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित करता है. इसे मानव जीवन के लिये गंभीर चुनौती माना गया है. तो वैश्विक स्तर पर इससे उबरने के लिये लगातार प्रयास भी किये जा रहे हैं. लेकिन इसे लेकर किया जाने वाला कोई भी प्रयास तब तक सफल नहीं हो सकता है. जब तक इन प्रयासों को लेकर वैक्तिगत व सामाजिक स्तर पर संवेदनशील रवैया नहीं अपनाया जाता. इतना ही नहीं पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े मामलों में कमी लाने के लिये नगर निकायों व जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर से भी ईमानदार प्रयास की जरूरत है.
पहले से प्रदूषित बड़े शहरों में दिखा कोरोना का असर
प्रसिद्ध पर्यावरणविद व पीटीआई के प्रतिनिधि सूदन सहाय के मुताबिक स्वच्छ पर्यावरण हर व्यक्ति के जीवन जीने के अधिकार से जुड़ा मामला है. दूषित पर्यावरण संपूर्ण जीव जगत के लिये गंभीर चुनौती खड़ी कर सकता है. अफसोस कि हमारा शिक्षित समाज भी इन चुनौतियों के प्रति अपनी आंख मूंदे खड़े हैं. यही कारण है कि शहर के पॉस इलाकों में भी जहां-तहां कूड़े कचरों का अंबार खड़ा दिख जाता है. जो बेहद चिंतनीय है. उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण ने वैसे शहरों में ज्यादा तांडव मचाया, जहां वायु प्रदुषण का स्तर पहले से ही बेहद खराब था. दिल्ली, मुंबई व कलकत्ता जैसे बड़े शहर इसके उदाहरण हैं. जाहिर है कि वायु प्रदुषण हमारे फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है. कोरोना वायरस भी हमारे फेफड़ों को संक्रमित कर स्वश्न संबंधी दिक्कतें खड़ी करता है. जिस वजह से लोगों की मौत तक हो सकती है. मतलब ये कि जहां वायु प्रदूषण का स्तर अधिक था. उन सभी जगहों पर कोरोना का कहर भी अधिक देखा गया.
समस्त मानव जाति पर है पर्यावरण शुद्ध बनाये रखने की जिम्मेदारी
पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े मुद्दों को लेकर बेहद संवेदनशील रवैया रखने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय के कला शिक्षक मूर्तिकार राजेश कुमार पर्यावरण में विसंगति पैदा करने वाले कारकों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि पर्यावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाये रखने की जिम्मेदारी समस्त मानव जाति पर है. पर्यावरण की शुद्धता को लेकर हमें साकारात्मक रवैया अपनाना होगा. हमें अपने आसपास के परिसर ही नहीं सभी सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के साथ-साथ अपने देवालयों में स्वच्छ व सुंदर पर्यावरण के निर्माण के लिये सामुहिक प्रयास करने होंगे. अपने आस-पास के माहौल को स्वच्छ व सुंदर बनाये रखने के लिये पारिवारिक, सामाजिक व संस्थागत प्रयास करने होंगे. लिहाज समाज के लोगों को ही नहीं सरकारी मिशनरियों, नगर निकायों को भी पर्यावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाये रखने के लिये संवेदनशील रवैया अपनाना होगा. कचरा प्रबंधन व इसके निस्तारण के उपलब्ध इंतजाम को दुरूस्त करने होंगे. तब जाकर हम कोरोना जैसे किसी दूसरे वैश्विक महामारी के साथ-साथ पर्यावरण जनित अन्य समस्याओं का सख्ती से मुकाबला कर पाने में सक्षम हो सकेंगे.
पर्यावरण की शुद्धता के लिये करें इन उपायों पर अमल
अपने घर के आस-पास कचरों का अंबार नहीं लगने दें
कचरा निश्चित रूप से कूडेदान में डाले
जहां तहां कूडा करकट जमा करने से करें परहेज
जहां तक संभव हो प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल से करें परहेज
आस-पास को स्वच्छ व सुंदर बनाये रखने के लिये नगर निकाय सहित अन्य संस्था का करें सहयोग