जंगली सूअर व नीलगाय के आतंक से किसान परेशान, फसलों को कर रहें है नुकसान

संजय सिंह सेंगर की रिर्पोट। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
तरैया (सारण)। प्रखंड के कई गांवों में जंगली सूअर व नीलगाय के आतंक से किसान परेशान हैं। नीलगाय रात्रि में किसानों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। खेतों में लगाये गए फसलों को बर्बाद होता देख किसान रतजगा करने को मजबूर हो रहे हैं। आलम यह है कि नीलगाय व जंगली सूअर किसानों के लिए आतंक बन चुके हैं। नीलगाय फसलों को रौंद कर उन्हें बर्बाद कर आर्थिक नुकसान पहुंचा रही हैं। यही नहीं अब ये हिंसक होकर किसानों पर आक्रमण कर उनकी जान भी लेने की कोशिश कर रही हैं। वहीं जंगली सूअर के हमले से आए दिन लोग जख्मी हो रहे हैं। ये किसानों पर हमला भी कर रहीं हैं। प्रखंड के पचभिण्डा, बेलहर, कुशवाहा टोला, बेलहरी, फरीदपुरा, शाहनेवाजपुर, आकुचक, भटगाई, चंचलिया, राजधानी, उसरी, पिपरा, बगही, मुकुन्दपुर, अरदेवा, माधोपुर, समेत कई गांवों के किसान नीलगाय व जंगली सूअर के आतंक से परेशान हो रहे हैं। इस क्षेत्र में नीलगाय सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन इलाकों के किसान फसलों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित है और रतजगा कर रहे हैं। पचभिण्डा निवासी प्रमोद सिंह, अजय सिंह, भूषण सिंह, कैलाश सिंह, मनोज सिंह समेत दर्जनों किसान के खेतों में लगी गोभी व आलू, गेहूं, मक्का की फसलों को नीलगाय व जंगली सूअर बर्बाद कर दिए हैं। उसी गांव के गुड्डू सिंह कुशवाहा कहते हैं कि नीलगाय किसानों के लिए आतंक बन चुकी हैं। ये फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर रही हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ ही वे दहशत में भी हैं। सरकार ने मुआवजा का प्रावधान किया है, लेकिन राशि भी कम और प्रक्रिया भी इतनी जटिल है कि मुआवजा नहीं मिल पाता। किसान शैलेन्द्र सिंह, मनोज सिंह, विजय सिंह, शंकर सिंह, आदि ने कहा कि सरकार को इसका स्थायी समाधान तलाशना चाहिए।


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