नीलगाय कर रही फसलों को क्षतिग्रस्त, सैकड़ो किसान नीलगाय के आतंक से है परेशान
राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
गड़खा (सारण)। गड़खा के मिर्जापुर,श्रीपाल बसन्त,जलाल बसन्त,कुदरबाधा, इटवा, रामपुर,मिठेपुर,बाजितपुर,गड़खा, हसनपुरा,मीरपुर जुआरा,पँचपतिया, कोठिया, नराव,सरगट्टी समेत अन्य पंचायतो में सैकड़ो गाँवो के किसान नीलगाय के आतंक से परेशान हैं।मिर्जापुर पंचायत के किसान मुन्ना उपाध्याय,हरेन्द्र राय बताते हैं कि जंगली नीलगाय दिन में बागीचे में जाकर छीप जाते हैं और रात में गेहु,मक्का,आलू व तेलहन की खेती को रातभर नुकसान करते हैं। सब्जी उगाने वाले किसान जयनाथ कुशवाहा कहते हैं कि फूलगोभी,बंदागोभी,बैगन की खेती करना नीलगाय के आतंक के कारण बहुत से किसान छोड़ चुके हैं और लगता है कि आने वाले दिनो में सब्जी की खेती करना और मुश्किल हो जायेगा।किसानों का कहना है कि स्थानीय किसानो ने मिलकर नीलगाय मारने के लिये विगत वर्ष गड़खा सीओ आवेदन दिये थे पर कोई कार्रवाई नही हुई।वे फोन भी नही उठाये।किसान अनुज उपाध्याय बताये कि पिछले वर्ष विधान परिषद् में सुशील मोदी ने बयान दिया था कि नीलगाय को मारने के लिये जनता के तरफ से कोई आवेदन नही आया है।अगर आवेदन आता है तो उस पर विचार कर उचित कार्रवाई किया जायेगा।इसके लिये वन प्रमंडलीय अधिकारी को उन्होने अधिकृत करने की बात की थी,इसे अखबारों में पढ़कर किसान वन प्रमंडलीय अधिकारी के पास गये तो अधिकारी ने बताया कि मेरे पास ऐसा कोई आदेश नही आया है।उन्होने आवेदन लेने से इन्कार करते हुए प्रखण्ड के सीओ को जाकर आवेदन देने को कहा। किसान आवेदन सीओ को दिये पर आज तक कोई कार्रवाई नही हुई।ऐसे में किसान कहां जायें।दरियापुर-धनौती के राजेन्द्र कुशवाहा जैसे कई सब्जी उत्पादक किसान नीलगाय के आतंक के कारण अपनी पुश्तैनी धंधा सब्जी की खेती छोड़कर दिल्ली जाने को मजबूर हो रहे हैं।लोगों का कहना है कि इस बार बाढ आने के बावजूद नीलगायों की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ा है।


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