छपरा: दिघवारा में चरितार्थ हो रहा कहावत- ‘धन धनराज के आऽ नाम दुखहरण के’
लेखक- राणा परमार अखिलेश
दिघवारा (सारण) धन धनराज के आऽ नाम दुखहरण के ‘ यह कहावत प्रखंड के ईशमेला- ककड़ियां दियारा क्षेत्र में चरितार्थ हो रहा है। कैसे? का उत्तर दे रहा है ईशमेला निवासी शैलेश कुमार सिंह व छोटू कुमार सिंह का जिला पुलिस कप्तान, पुलिस अप महानिरीक्षक एवं पुलिस महानिदेशक को प्रेषित अवेदन पत्र । बहरहाल, बहरहाल, भू-स्वामी द्वय ने कहा है कि यदि पुलिस विभाग द्वारा आरोपित दिघवारा व अकिलपुर थानाध्यक्ष, अंचलाधिकारी दिघवारा सहित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो फिर मामला कोर्ट तक जाएगा और वैधानिकता को चुनौती दी जाएगी ।
जाहिर है कि ईशमेला-ककड़ियां दियारा क्षेत्र के 160 बिगहा जमीन में कुछ दलित वर्ग को पट्टा पर प्राप्त हुए हैं, विजय सिंह आदि ने कुछ जमीन भू-स्वामियों से एग्रीमेंट पर एक तयशुदा राशि पर लिया है और कुछ स्वयंभू बटाईदार हैं जो कथित रूप से बटाई ली है। इसके अलावा एक संगठित गिरोह जबरन फसल लूटने पर अमादा था । ऐसे में पुलिस-प्रशासन क्या करता? बकौल दिघवारा थानाध्यक्ष मिहिर कुमार ” मैंने हलका चौकीदार के मार्फत भू-स्वामियों को जमीनी कागजात सहित थाना पर उपस्थित होने के इत्तला दी ,किंतु कोई नहीं आया । दिघवारा अंचलाधिकारी व स्वयं दियारा की जमीनी सच्चाई से रूबरू होने के बाद सीआरपीसी की धारा 144 की संस्तुति की । जिला पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी के संज्ञान ने जानकारी देकर फसल कटाई के बाद ढुलाई व दौनी कर थाना परिसर में स्टोर किया गया ।चूंकि फसल राष्ट्रीय संपत्ति है ।लिहाजा, बिक्री कर कोर्ट के फैसले के बाद विजयी पक्ष को राशि दी जाएगी । किंतु भू-स्वामियों ने बताया कि 11अप्रैल को हम कागजात सहित आ रहे थे, 11 बजे का समय निर्धारित था और सीओ दिघवारा व थानाध्यक्ष दियारा की ओर 10:30 बजे प्रस्थान कर चुके थे। 12 अप्रैल को बंदूक व राइफल के बल पर फसल कटवाने में सफल रहे । जब हम रोकने गए तो गोली मार कर लाश नदी में फेंक देने की धमकी मिली । जबकि थानाध्यक्ष मिहिर कुमार के अनुसार न तो कोई जमीन पर गया न थाने पर आया ।
सवाल उठता है कि 144 की कार्रवाई क्या बंटाईदारों के एग्रीमेंट पेपर व मौखिक आधार पर हुई? यह सही है कि फसल राष्ट्रीय संपत्ति है और उसकी सुरक्षा होनी चाहिए ।किंतु फसल बिक्री की राशि क्या भू-स्वामियों को प्राप्त होगी? सीआरपीसी की धारा 144 में दोनों पक्षों में शायद ही कोई भू-स्वामी हो? तो फिर एक और कहावत सही व सटीक होगी ‘ राजा को पता नहीं भीलों ने बाँट लिया जंगल ।
सनद रहे कि पूर्व में कभी सीपी सिंह गिरोह कभी रूदल सिंह गिरोह, कभी कालिका राय गिरोह भूस्वामियों, बंटाईदारों की हकमारी कर फसल कटाई कर ले जाने में सफल हुए थे। अप्रैल 2012 में हुए गैगवार में एक व्यक्ति मारा गया था । लिहाजा, पुलिस की जिम्मेदारी न सिर्फ फसल कटाई थी बल्कि कई मामलों में फरार बदमाशों की तालाश भी थी, मगर, कोई भी गिरोह पुलिस के साथ मुठभेड़ के लिए आगे नहीं आया । अब देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस-प्रशासन बनाम भूस्वामियों बनाम बंटाईदारों के इस विवाद का लाभ किसे प्राप्त होता है?


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