बाबू वीर कुंवर सिंह का विजयोत्सव यानी, अंग्रेजों के खिलाफ भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के सिंहनाद का विजय उत्सव :-चन्देल
छपरा (सारण)- गुरुवार को बाबू वीर कुंवर सिंह के 162वें विजयोत्सव के अवसर पर भारतीय शिक्षण मंडल के प्रदेश सह मंत्री विश्वजीत सिंह चन्देल ने कहा कि इस वर्ष बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव कई मायने में महत्वपूर्ण है| बाबू वीर कुंवर सिंह के जीवन के संघर्ष से सीखने का समय है ।विकट परिस्थितियों में धैर्य का क्या महत्व है? आज जानने की आवश्यकता है। लॉक डाउन के कारण पूरा भारत बंद है। विजय उत्सव कार्यक्रम धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन लॉक डाउन होने के कारण बाबू वीर कुंवर सिंह के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित करके घर पर ही मनाया गया। बाबू वीर कुंवर सिंह का विजयोत्सव यानी, अंग्रेजों के खिलाफ भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के सिंहनाद का विजय उत्सव है। बाबू वीर कुंवर सिंह ने 23 अप्रैल 1857 को अपने जगदीशपुर के किले पर से अंग्रेजों का यूनियन जैक उतारकर और भारतीय तिरंगा झंडा फहराकर आजाद कराया था| यह दिन और इस दिन की घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए न केवल ऐतिहासिक थी, बल्कि संभवतः पहली भी थी| आजादी के लिए बेचैन पूरे देश के लिए यह रास्ता दिखाने वाला प्रेरक उदहारण भी बन गयी| इस दिन को पूरे बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव के रूप में मनाया जाता है|कई बार ऐसा लगता है कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बाबू वीर कुंवर सिंह जी का योगदान जितना बड़ा है, देश के स्तर पर उन्हें उस प्रकार से याद नहीं किया जाता| देश में स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखने वाले इस अमर सेनानी को उनके योगदान और सम्मान के अनुरूप याद किये जाने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी अपने इस नायक को सही ढंग से जान सके और प्रेरणा ले सके|


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