राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
छपरा (सारण)। जिलाधिकारी डॉ निलेश रामचन्द्र देवरे की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिला स्तरीय अन्तर्विभागीय कार्य समूह की बैठक संपन्न हुयी जिसमें जिलाधिकारी ने कहा कि कृषि प्रसार कर्मी सतत भ्रमणशील रह कर यह देखें की कोई किसान खेत में पराली रहीं जलाए। खेत में पराली जलाना मना है। ऐसा करने पर खेत की उर्वरा शक्ति पर तो प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हीं है इसके साथ ही वातावरण भी प्रदूषित होता है जो जलवायु परिर्वतन का एक कारक हो सकता है। इसके लिए जन जागरुकता की जरुरत है।
जिलाधिकारी ने कहा कि खेतों में फसल अवशेष को जलाने के बदले खेत की सफाई हेतु बेलर मशीन का प्रयोग, वर्मी कम्पोस्ट बनाने, मिट्टि में मिलाने अथवा माल्चिंग विधि से खेती आदि में व्यवहार कर मिट्टि की उर्वरा शक्ति को बचाया जा सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे किसान परिवार जिनके किसी भी सदस्य द्वारा यदि फसल अवशेष जलाया जाता है तो उस किसान परिवार के सभी सदस्यों की कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित करने का निर्णय लेते हुए ऐसे किसानों के पंजीकरण को 3 वर्ष तक बाधित करने का प्रावघान किया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी के द्वारा बताया गया कि अभी तक कहीं से भी पराली जलाने की सूचना प्राप्त नहीं है। इसके साथ हीं जिलाधिकारी के द्वारा कृषि टाक्स फोर्स के कार्यों की समीक्षा की गयी और पदाधिकारियों को जरुरी निर्देश दिया गया। बैठक में जिलाधिकारी के साथ अपर समाहत्र्ता डॉ गगन, अपर समाहत्र्ता विभागीय जाँच भरत भूषण प्रसाद, जिला कृषि पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।



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