संजीव शर्मा। राष्ट्रनायक न्यूज।
मांझी (सारण)। छपरा से मांझी शव लाने के एवज में हजार से बारह सौ की जगह परिजनों से छह से आठ हजार रुपये वसूल रहे हैं एम्बुलेन्स संचालक। कई लोगो ने बताया कि चाहे किसी बीमारी से मृत्यु हुई हो शव पहुंचाने का मनमानी किराया वसूला जा रहा है। गरीब व लाचार परिजन दाह संस्कार के बजाय शव को दफना रहे हैं। चूंकि महज ढाई तीन हजार रुपये में दफनाने का काम पूरा कर लिया जा रहा है। शव दफनाने में लगे मजदूर नदी की रेत पर शव को दफनाने के लिए गड्ढा खोदने का दो से ढाई हजार रुपया वसूल रहे हैं। खासकर कोरोना संक्रमित शवों दफनाने अथवा दाह संस्कार कराने में एम्बुलेन्स चालक भाई से बढ़कर सम्मान पा रहे हैं। आजकल चालकों के क्रेज बढ़ा हुआ है। चूंकि दाह संस्कार में शायद ही पांच दस लोग इकट्ठा हो पा रहे हैं। कोरोना संक्रमित शवों को अर्थी भी नसीब नही हो पा रही है। परिजन स्ट्रेचर पर ही शव को लेकर चिता तक जाते हैं तथा लंबी मशाल के सहारे चिता में अग्नि प्रवाहित कर रहे हैं। सामाजिक परम्परा को दरकिनार कर कीट समेत लोग शवों को जला रहे हैं। और तो और चित्त में आग लगाकर अधिकांश श्वयात्री निकल पड़ते हैं। अग्नि संस्कार में अब महादलित नाइ व ब्राम्हण कही दिखाई नही देते।


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