राष्ट्रनायक न्यूज।
छपरा (सारण)। मुस्लिम भाईयों का रमज़ानुल मुबारक का आखिरी जुमा जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है, जिसे मुसलमान भाईयों ने कोरोना माहामारी को ध्यान में रखते हुए नम आंखों से सरकार के काविड के नियमों का पालन करते हुए घरों में ही अलविदा जुमा के बदले में नमाज़े ज़ुहर अदा किया। इस्लामी जलसा के प्रसिद्ध एनाउंसर सह सुन्नी एकेडमी के अध्यक्ष हाफ़िज़ साहेब रज़ा ख़ान छपरवी एवं अर्शी आजम ने बताया कि रमज़ानुल मुबारक में जुमा का विशेष महत्व है और आखिरी जुमा का और भी अति महत्वपूर्ण माना जाता है इस महीने में शैतान क़ैद कर दिये जातें हैं,और जुमा के दिनों में जहन्नम से गुनहगारों की रिहाई होती है।एक नेकी के बदले दस नेकियां मिलती है वहीं जुमा के दिन एक नेकी के बदले में सत्तर नेकियां मिलती हैं।श्री छपरवी ने कहा कि मुस्लिम समाज रमज़ानुल मुबारक के पवित्र महीने में इस माहामारी से मुक्ति के लिए विशेष दुआ का आयोजन करे।


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