राष्ट्रनायक न्यूज

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महाराणा प्रताप और मुगलों का युद्ध हिन्‍दू-मुसलमान के बीच नहीं बल्कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए: चंदेल

प्रो. संजय पाण्डेय। राष्ट्रनायक न्यूज।

छपरा (सारण)रविवार को भारतीय शिक्षण मंडल के प्रदेश सह मंत्री, शिक्षक नेता विश्वजीत सिंह चंदेल ने कहा कि महाराणा प्रताप जयंती नौ मई को प्रत्येक वर्ष धूमधाम से मनाई जाती है , हर वर्ष इस अवसर पर  कार्यक्रम आयोजित होते थे। लेकिन कोरोना के चलते शासन के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए इस वर्ष कोई आयोजन नहीं किया जा रहा है। इस बार घर पर उनके तैल चित्र पर पुष्पांजलि करके जयंती मनाई गई। जयंती के अवसर पर चंदेल ने  महाराणा प्रताप को महान योद्धा बताते हुए कहा कि इस राष्‍ट्रनायक ने युद्ध में भी नैतिकता का पालन किया। महाराणा प्रताप शरीर पर करीब दो सौ किलोग्राम का वजन लादे दुश्‍मनों को युद्धभूमि में धूल चटाते रहे। शत्रुओं के साथ भी कभी छल-कपट का सहारा नहीं लिया। महाराणा प्रताप और मुगलों का युद्ध हिन्‍दू-मुसलमान के बीच नहीं बल्कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए विदेशी अक्रांताओं के विरुद्ध किया गया संघर्ष था। महाराणा प्रताप ने तमाम मुश्किलें झेलकर भी कभी समझौता नहीं किया। उनका जीवन चरित्र भारत की तरुणाई को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। इस बात से कदापि इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत की स्वतंत्रता की भावना जाग्रत करने का श्रेय ‘राणा’ को ही जाता है। जिन्होंने विदेशी मुगलिया शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता का पहला बिगुल बजाया था। ‘हल्दी घाटी’ का युद्ध उसी प्रकार विदेशी शासन के विरुद्ध था जिस प्रकार भारत का स्वतंत्रता संग्राम। ‘हल्दी घाटी’ का युद्ध किसी जाति अथवा वर्ग विशेष के विरुद्ध न होकर एक विदेशी हुकूमत के विरुद्ध था और उस प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नायक था ‘प्रणवीर, राणा प्रताप’। हल्दी घाटी और स्वतंत्रता संग्राम दोनों विदेशी सत्ता के विरुद्ध हुए चाहे वह मुगलिया हुकूमत हो अथवा अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध। इस प्रकार यह र्निविवाद सत्य है कि राणा प्रताप ही इस देश के प्रथम स्वतंत्रता के प्रेरणा स्रोत थे।साहस व समर्पण के प्रतीक मेवाड़ मुकुट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर उनको वंदन करते हुए  हम सभी से आह्वान करते है कि प्रताप के संघर्षमयी व स्वाभिमानी जीवन से प्रेरणा लें तथा जनसेवा का सकंल्प लेकर नवभारत के निर्माण में भागीदारी निभाएं। महाराणा प्रताप 481 वी जयंती  के अवसर शाम सात बजे घरों में ही दीप-धूप प्रज्जवलित करके कोरोना महामारी से बचाव और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करंगे।