नई दिल्ली, (एजेंसी)। खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों की वजह से आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। इसको लेकर अब केंद्र सरकार भी एक्शन मोड में आ गई है। यही वजह है कि खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण सचिव ने राज्यों के अधिकारियों के साथ बैठक की है। इस बैठक में एक साथ कई अहम आदेश दिए गए हैं। क्या दिए गए आदेश: आधिकारिक बयान के मुताबिक थोक और खुदरा विक्रेताओं को अपने परिसर में खाद्य तेल की कीमतों को प्रदर्शित करना होगा। इसके अलावा थोक विक्रेताओं, मिल मालिकों को अब अपने पास उपलब्ध तिलहन और खाद्य तेलों के स्टॉक का खुलासा करना होगा। वहीं, पारदर्शिता और बेहतर निगरानी के लिए सभी मिल मालिक और थोक विक्रेता एक पोर्टल पर डेटा जमा करेंगे।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण सचिव ने बताया कि रबी के आगामी मौसम में तिलहन का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इससे खाद्य तेलों की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है। वहीं, स्टॉक का खुलासा करने से अनुचित व्यवहारों और जमाखोरी आदि पर रोक लगेगी। बता दें कि पिछले एक साल में देश में खुदरा खाद्य तेल की कीमतें 41 से 50 फीसदी तक बढ़ी हैं। आयात शुल्क पर फैसला अभी नहीं: क्या खाद्य तेलों पर आयात शुल्क को और कम करने की योजना है, इस पर सरकार की ओर से बयान दिया गया है कि कीमतों के व्यवहार का विश्लेषण करने के बाद इस बात का फैसला किया जाएगा। सरकार ने 30 सितंबर तक के लिए कच्चे पाम तेल (सीपीओ) पर आयात शुल्क 35.75 प्रतिशत से घटाकर 30.25 प्रतिशत की है जबकि रिफाइंड पाम तेल पर आयात शुल्क 49.5 प्रतिशत से घटाकर 41.25 प्रतिशत किया गया है। रिफाइंड सोया तेल और सूरजमुखी तेल पर भी आयात शुल्क सितंबर अंत तक 45 प्रतिशत से घटाकर 37.5 प्रतिशत कर दिया गया है।


More Stories
भारत में भ्रष्टाचार और अपराध के कारण तथा उनका निवारण
हर घर दस्तक देंगी आशा कार्यकर्ता, कालाजार के रोगियों की होगी खोज
लैटरल ऐंट्री” आरक्षण समाप्त करने की एक और साजिश है, वर्ष 2018 में 9 लैटरल भर्तियों के जरिए अबतक हो चूका 60-62 बहाली