सड़क दुर्घटना में घायलों की बेहिचक करें मदद, पुलिस जबरन नहीं बना सकती गवाह, पुलिस ने जारी किया गाइडलाइन
पंकज कुमार सिंह। राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
मशरक (सारण)। आप यदि सड़क दुर्घटना के घायल पीड़ितों की बेहिचक मदद करने में पुलिस के लफड़े से डरते हैं तो अब आप डरे नहीं। अब पुलिस इस मामले में जबरन गवाह नहीं बना सकती है। मदद करने वाले व्यक्तियों को पुलिस और अस्पताल प्रशासन से किसी प्रकार की परेशानी भी नही होंगी। इसके लिए बिहार सड़क सुरक्षा परिषद द्वारा गुड सेमिरिटन से संबंधित प्रावधानों को टिन प्लेट बोर्ड पर मुद्रित करा कर सारण के सभी थानों और अस्पतालों में टिन प्लेट के बोर्ड मुख्य जगहों पर लगाये जा रहे हैं।मामले में मशरक थानाध्यक्ष रत्नेश कुमार वर्मा ने बताया कि सारण पुलिस अधीक्षक हरि किशोर राय ने सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करने हेतु प्रेरित करने के लिए विशेष अभियान चलाया है जिसमें थाना क्षेत्र में जो भी सड़क दुघर्टना में घायलों की मदद करता है उसे वे सम्मानित कर रहे हैं। थानाध्यक्ष ने बताया कि सड़क दुर्घटना के घायल पीड़ितों को अगर समय पर अस्पताल पहुचा दिया जाए और समुचित इलाज हो तो उनकी जान बचाई जा सकती है। कई बार लोग थाना और पुलिस के लफड़े के डर से मदद नहीं करते हैं। ऐसे लोगों को डरने की आवश्यकता नहीं है।आमलोग बेहिचक सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद को आगे आएं इसके लिए गुड सेमिरिटन से संबंधित प्रावधानों को जानना आवश्यक है। इसलिए पुलिस अधीक्षक हरि किशोर राय ने जिले के महत्वपूर्ण विभागों समेत सभी थाना क्षेत्र के लोगों की जानकारी एवं जागरूकता के लिए थाना के गेट पर और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों पर टिन प्लेटों पर इस सम्बंधित दिशा निर्देश को बोर्ड के माध्यम से लगाया गया है।
पुलिस के लिए दिए गए हैं ये निर्देश
दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले गुड सेमिरिटन (अच्छे मददगार ) से पुलिस पदाधिकारी गुड सेमिरिटन को अपना नाम, पहचान और पता देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं ।यदि कोई गुड सेमिरिटन पुलिस थाने में स्वेच्छा से जाने का चयन करता है तो उससे बिना किसी अनुचित विलंब के एक तर्कसंगत और समयबद्ध रूप से एक ही बार में पूछताछ की जाएगी।
क्या है नियम
घायल पीड़ितों की मदद करने वाले व्यक्तियों (गुड सेमिरिटन) की रक्षा के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार एवं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दिशा निर्देश दिए गए हैं। उसी के आलोक में जागरूकता हेतु कार्रवाई की जा रही है।सड़क पर घायल किसी व्यक्ति के बारे में पुलिस को सूचना देने के पश्चात संबंधित पुलिस पदाधिकारियों द्वारा गुड सेमिरिटन को जाने की अनुमति दी जाएगी और यदि गुड सेमिरिटन उस मामले में गवाह बनने का इच्छुक नहीं होता है तो उससे कोई पूछताछ नहीं की जाएगी ।जांच पड़ताल करते समय ऐसे गुड सेमिरिटन का पूरा बयान या शपथ पत्र पुलिस अधिकारी द्वारा एक ही बार पूछताछ के दौरान रिकॉर्ड किया जाएगा ।
अस्पताल के लिए भी है दिशा निर्देश
किसी भी परिस्थिति में जख्मी व्यक्ति को निकटवर्ती सरकारी /निजी अस्पताल में लेकर आने वाले गुड सेमिरिटन से किसी भी तरह के रजिस्ट्रेशन शुल्क या अन्य संबंधित पैसे की मांग नहीं की जाएगी । यह मांग तभी की जा सकती है जब जख्मी व्यक्ति को लाने वाला व्यक्ति उसका संबंधी हो ।गुड सेमिरिटन को उनके कार्यों के लिए प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा ।जख्मी व्यक्ति का इलाज करना अस्पताल की सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि ईलाज में विलंब से जान जा सकती है।


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