देश दुश्मनों से नहीं, हारा है तो देशद्रोहियों से, राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन का चंदा का फंडा
- ‘सर तोड़ने की खातिर लिए नाप बैठे हैं ।
तैयारी है मुकम्मल है तो ड्रैगन काँप बैठे है।
‘राणा परमार’ तवारीख की तसदीक करलो फिर,
राणा परमार अखिलेश छपरा (सारण )
यहाँ तो वर्षों गद्दार दुमुँहे घर में साँप बैठे हैं ।’ उक्त असयार की हकीकत तब सामने आयी जब लद्दाख में चीन की विस्तारवादी नीति आयी, 15 जून को खूनी संघर्ष में बिहार रेजिमेंट के 20 जवानों ने शहादत दी और दुगने चीनी जवानों की गर्दन मरोड़ कर जहन्नुम रसीद की। सर्वदलीय बैठक में सोनिया गाँधी व राहुल गांधी का सवाल? बहरहाल, जवाब दिया भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने क्या राजीव गांधी फाउण्डेशन में चीन का चंदा भी दिया ? कांग्रेसी ढोल का पोल अब पूरे देश के सामने आ गया कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही?
सनद रहे कि 21 जून 1991 में स्थापित राजीव गांधी फाउण्डेशन के तत्वावधान में शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक, महिला बाल विकास, पंचायती राज, निशक्तों की सहायता ,प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन आदि पवित्र मिशन के तहत 2011 तक क्रियाशील रहा। फाउंडेशन के अध्यक्ष सोनिया गाँधी, ट्रस्टी डाॅ मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, प्रो एनएस स्वामीनाथन, डाॅ अशोक गांगुली रहे इस दौरान चीनी दूतावास और इंटरनेशनल फ्रेंडली कांट्रैक्ट से 3 लाख अमरीका डाॅलर चंदा आजीसी को मिला। जाहिर है उक्त संगठन ‘ मिलिट्री कमीशन ऑफ चाइना ‘ का अंग है और इसका उद्देश्य दूसरों आवाज को ऐनकेनप्रकारेन दबाना है।
यह चंदा 2005- 06 में मिला था। यही नहीं प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रति वर्ष 20 करोड़ की राशि फाउंडेशन के देने की घोषणा संप्रग सरकार के प्रधानमंत्री डाॅ मनमोहन सिंह ने बजट सत्र में की है 2013 तक 100 करोड़ रूपये फाउंडेशन को प्राप्त हुए । इतना ही नहीं गेल इंडिया, ओएनजीसी, एफबीआई, सेल, एनएचएआई, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, बैंक ऑफ महाराष्ट्रा, ओरिएंटल बैंक से भी राशि फाउंडेशन को प्राप्त हुए । नीरव मोदी भी संभव है चंदा देने में शरीक हो? फाउंडेशन ने केदारनाथ त्रासदी के अलावा राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, क्रिश्चियन मिशनरी वर्ल्ड विजन में राशि खर्च की । संभव है कि जाकिर नाइक को भी मदद मिली हो। पाकिस्तान के विरूद्ध सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँगना, सेना के नौजवानों को गुंडा कहना, अफजल गुरु से हमदर्दी, हिंदू आतंकवाद जैसे कांग्रेसी नेताओं द्वारा भगवाद, असहिष्णुता आदि के पीछे क्या देश भक्ति है? पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की स्वीकारोक्ति सत्य है यदि चीन से प्राप्त राशि वापस कर दी जाये तो क्या वह अतिक्रमित भूमि वापस कर देगा? तो फिर सवाल उठता है कि क्या 35000 वर्ग किलोमीटर भारतीय भू भाग पर कांग्रेस ने तिब्बत की तरह चीन की प्रभुसत्ता स्वीकार कर ली है और उसके एवज में चीन से सौदा कर चुकी है?


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