पंकज कुमार सिंह। राष्ट्रनायक न्यूज।
मशरक (सारण)। प्रखंड क्षेत्र में आस्था के महापर्व छठ के जश्न में सभी गोते लगा रहे है। चार दिवसीय महापर्व के तीसरे दिन संध्या पहर में अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को विभिन्न छठ घाटों पर अर्घ्य दिया गया। वही छठ घाटो से वापसी के बाद बुधवार की रात व्रतियों ने अपने अपने घरों में कोसी भरी गयी। घर के सभी सदस्यों के साथ व्रतियों ने कोसी भरी। इस अवसर पर व्रतियों और महिलाओं ने पारंपरिक छठ गीतों को भी गाया जा रहा था।ऐसी मान्यता है कि अपने मन्नतों की पूर्ति होने के बाद छठ व्रती अनुष्ठान के तीसरे दिन प्रथम अर्घ्य देने के बाद अपने घर के आँगन एवं छत पर कोसी भराई की विधि पूरी की जाती है. दूसरे दिन प्रातः अनुष्ठान के चौथे दिन छठ घाट पर पुनः इन कोसी को भरा जाता है। जिसके बाद उदयीमान भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया जाता है। आचार्य वाचस्पति तिवारी ने बताया कि कोसी भरने के कुछ नियम और विधियां हैं। इसे काफी सावधानी से करना होता है। सबसे पहले पूजा करते समय मिट्टी के हाथी को सिन्दूर लगाकर कलश में मौसमी फल और ठेकुआ, अदरक, सुथनी सहित सभी सामग्री रखी जाती है। कोसी पर दीया जलाया जाता है। उसके बाद कोसी के चारों ओर अर्घ्य की सामग्री से भरी सूप, डगरा, डलिया, मिट्टी के ढक्क्न में तांबे के पात्र को रखकर दीया जलाते हैं। इस दौरान धूप डालकर हवन करते हैं और छठी मइया की पूजा करते हैं। यही प्रक्रिया अगली सुबह नदी घाट पर दोहरायी जाती है। इस दौरान महिलाएं गीत गाकर मन्नत पूरी होने की खुशी और आभार व्यक्त करती है।


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