राष्ट्रनायक न्यूज।
कुछ लोग दोस्तों को भूल गये
कुछ वो है जो दोस्ती करना ही भूल गये
कुछ और है जो दोस्ती के वसूलो को भूल गये है
वो दोस्ती में व्यापार कर रहे है
दोस्ती को खरीद और दोस्तों को बेच रहे है।
उनसे आज की बात पूछा तो कल की बात करेंगे।
कल की पूछो तो आमरण अनशन करेंगे
अपनी हर बात पर वो जजबाती हो गये है।
कल तक दोस्तों से बढके स्वर्ग भी नहीं था।
अब तो दोस्तों के लिए घर भी नहीं है।
आज लोग इतने खुदगरजी हो गये है।
सूर्येश प्रसाद निर्मल शीतलपुर तरैयाँ


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