- अभी तक 7 महादलित बस्ती में हीं बना है सामुदायिक भवन सह वर्कशेड
- सीओ, राजस्व कर्मचारी के बेरूखी से गैरमजरूआ जमीन का नहीं मिल रहा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
अरुण विद्रोही। राष्ट्रनायक न्यूज।
छपरा (सारण)। जिले के 318 पंचायतों के महादलित बस्ती में वर्कशेड यानी सामुदायिक भवन का निर्माण कराने को लेकर बिहार सरकार महत्वपूर्ण परियोजना संचालित कर रही है। ताकि महादलित समुदाय के जीवनस्तर में सुधार लाया जा सके। लेकिन आश्चर्य की बात है विभागीय पदाधिकारी के अनदेखी के कारण वर्कशेड बनाने की योजना अधर में लटक गया है। विकास मित्रों के सहयोग से जहां गैरमजरूआ जमीन उपलब्ध है, उस प्रखंड अंचलाधिकारी एवं राजस्व कर्मचारी के बेरूखी के कारण अनापति प्रमाण पत्र यानी एनओसी निर्गत नहीं किया जा रहा है। जिससे महादलित बस्ती में वर्कशेड का निर्माण नहीं हो पा रहा है। जानकारों की माने तो वर्कशेड यानी सामुदायिक भवन का निर्माण होने के बाद महादलित बस्ती के लोगों को सार्वजिक कार्य या छोटे-छोटे रोजगारपरख कार्य करने में आसानी होगी।
25 लाख की लागत से अभी तक 7 हीं बने वर्कशेल
समाज कल्याण विभाग ने प्रत्येक महादलित बस्ती में वर्कशेड बनाने की योजना के राशि को बढ़ाकर 25 लाख रूपये कर दिया गया है। ताकि बेहतर तरीके से वर्कशेड का निर्माण कराया जा सके। लेकिन आश्चर्य की बात कि वर्कशेड बनाने का प्राक्कलन 25 लाख किये जाने के बाद भी तक करीब सात भवन का हीं निर्माण कराया जा सका है। जानकारी के अनुसार दरियापुर प्रखंड में 5 और गड़खा, रिविलगंज में एक-एक वर्कशेड का निर्माण कराया जा सका है।
पुराने योजना से 5 लाख की लागत से 56 बने है सामुदायिक भवन
समाज कल्याण विभाग महादलित बस्ती के लोगों के सार्वजनिक कार्य एवं छोटे-छोटे रोजगारपरख कार्यो को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2011 में पांच लागत की वर्कशेड सह सामुदायिक भवन बनाने का प्रावधान किया गया। जिस पर जिले के करीब 56 महादलित बस्ती पांच लाख की लागत से वर्कशेड का निर्माण कराया गया है।
सीओ, राजस्व कर्मचारी के बेरूखी से गैरमजरूआ जमीन का नहीं मिल रहा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
जिले के महादलित बस्ती में गैरमजरूआ जमीन उपलब्ध होने के बाद भी वर्कशेड यानी सामुदायिक भवन का निर्माण नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के अभाव में नहीं बन पा रहा है। एक कर्मी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि जिले के कई प्रखंडों के महादलित बस्ती में जमीन उपलब्ध होने के बाद भी अंचलाधिकारी एवं राजस्व कर्मचारी द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने में रूची नहीं ले रहे है। जिसकी जानकारी प्रखंड कल्याण पदाधिकारी को होने के बाद भी अपने स्तर से प्रयास नहीं कर रहे है। जिससे सरकार की महत्वपूर्ण योजना विफल साबित हो रही है।
पंचायत के प्रत्येक महादलित बस्ती में बनना है वर्कशेड
जिले के प्रत्येक महादलित बस्ती में वर्कशेड यानी सामुदायिक भवन के निर्माण कराने को लेकर सभी विकास मित्रों को सर्वेक्षण करने को लेकर जिम्मेवारी दी गई है। जिस पंचायत के महादलित बस्ती में गैरमजरूआ जमीन उपलब्ध होने पर उसकी विवरणी प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के माध्यम से जिला कल्याण विभाग के कार्यालय में उपलब्ध कराना है। ताकि जमीन की उपलब्धता संबंधी प्रतिवेदन विभाग में भेजा जा सके। लेकिन आश्चर्य की बात है कि अभी तक गैरमजरूआ जमीन का सर्वेक्षण करने का कार्य कागजी फाइलों में सिमट कर रह गया है।
फेजवाइज बनेगा सामुदायिक भवन
जिले के 318 पंचायत के हर महादलित समुदाय के बस्ती में वर्कसेड यानी सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाएगा। जानकारी के अनुसार महादलित बस्ती में जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद प्रत्येक वर्ष फेजवाइज वर्कशेड यानी सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाएगा। जिससे सभी पंचायतों में भवन का निर्माण सुगमता से कराया जा सके।


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