संजय कुमार सिंह। राष्ट्रनायक न्यूज।
बनियापुर (सारण)। ईश्वर सिर्फ और सिर्फ प्रेम के भूखे होते है, तभी तो जब सबरी ने अपने को नीच जाति और मंदबुद्धि होने पर भगवान की स्तुति करने में असमर्थता प्रकट की तो प्रभु श्रीराम ने सबरी से कहा की मैं जीव से केवल भक्ति का सम्बन्ध मानता हूँ।जाति- पाति, कूल- धर्म, गुण, बल, कुटुंब और चतुरता होने पर भी भक्तिहीन मनुष्य वैसे ही है जैसे जल के बिना बादल। तुम में हर प्रकार की भक्ति है। अतः तुम मुझे अत्यंत प्रिय हो। उक्त बाते विद्याभूषण जी महाराज ने चेतन छपरा मोड़ पर चल रहे नौ दिवसीय रामचरितमानस नवाह पाठ के तीसरे दिन प्रवचन श्रवण को पहुँचे श्रद्धालु भक्तों के बिच कथा वाचन के दौरान कही। महाराज जी ने मर्याद पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शो की व्यख्या करते हुए कहा की प्रभु ने अपने पुत्र- धर्म, मित्र- धर्म, राज्य धर्म और पति- धर्म को पालन करने के लिये अपने सभी सुखो का त्याग कर जो आदर्श कायम किया है, उसकी मिसाल युगों-युगों तक दी जायेगी।रामचरितमानस का एक-एक शब्द मूल्यवान है, जिसके वाचन और श्रवण से मनुष्य को पूण्य की प्राप्ति होती है।प्रवचन श्रवण को लेकर दूर-दराज से भक्तो की काफी भीड़ जुटी रही जहाँ मूर्धन्य संतो की वाणी से निकली भक्ति रसधरा में गोते लगा श्रद्धालु अपने को धन्य-धान्य कर रहे है। यज्ञ समिति के अध्यक्ष घनश्याम राय सदस्य सच्चिदानंद शर्मा, हरि ठाकुर सहित सभी सदस्य यज्ञ स्थल पर सक्रियता से जुटे है।
फोटो(प्रवचन करते विद्याभूषण जी महाराज)|


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