ज्योतिषचार्य मैथिली शुक्ल। राष्ट्रनायक न्यूज।
जलालपुर (सारण)। मकर संक्रांति का पर्व आज मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन पौष मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन सूर्य का राशि परिवर्तन होगा और धनु राशि से सूर्य देव निकल कर मकर राशि में आ जाएंगे। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव की आराधना की जाती है। इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन, दान- पुण्य भी किया जाता है। आज से ही शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। चलिए जानते हैं मकर संक्रांति की पौराणिक कथा…
पौराणिक कथा
-मकर संक्रांति की पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान सूर्यदेव धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, इसलिये यह कहा जाता है कि मकर में प्रवेश कर सूर्यदेव अपने पुत्र से मिलने जाते हैं। राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान किया और अपने अश्व को विश्व –विजय के लिये छोड़ दिया। इंद्र देव ने उस अश्व को छल से कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। जब कपिल मुनि के आश्रम में राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र युद्ध के लिये पहुंचे और उनको अपशब्द कहा, तब कपिल मुनि ने श्राप देकर उन सबको भस्म कर दिया। राजकुमार अंशुमान, राजा सगर के पोते, ने कपिल मुनि के आश्रम में जाकर उनकी विनती की और अपने बंधुओं के उद्धार का मार्ग पूछा। तब कपिल मुनि ने बाताया कि इनके उद्धार के लिये गंगा जी को धरती पर लाना होगा।
राजकुमार अंशुमान ने प्रतिज्ञा की, कि उनके वंश का कोई भी राजा चैन से नहीं रहेगा जब तक गंगा जी को धरती पर ना ले आये। उनकी प्रतिज्ञा सुनकर कपिल मुनि ने उन्हें आशीर्वाद दिया। राजकुमार अंशुमान ने कठिन तप किया और उसी दौरान अपनी जान दे दी। भागीरथ, राजा दिलीप के पुत्र और अंशुमान के पौत्र थे। राजा भागीरथ ने कठिन तप करके गंगा जी को प्रसन्न किया और उन्हें धरती पर लाने के लिये मना लिया। उसके पश्चात, भागीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की जिससे कि महादेव, माँ गंगा को अपनी जटा में रख कर, वहां से धीरे-धीरे माँ गंगा के जल को धरती पर प्रवाहित करें। भागीरथ की कठिन तपस्या से महादेव प्रसन्न हुए और उन्हें इच्छित वर दिया। इसके बाद माँ गंगा, महादेव की जटा में समाहित होकर धरती के लिये प्रवाहित हुईं। भागीरथ, माँ गंगा को रास्ता दिखाते हुए कपिल मुनि के आश्रम गये, जहां पर उनके पूर्वजों की राख उद्धार के लिये प्रतीक्षारत थी। माँ गंगा के पावन जल से भागीरथ के पूर्वजों का उद्धार हुआ। उसके बाद माँ गंगा सागर में मिल गयीं। जिस दिन माँ गंगा, कपिल मुनि के आश्रम पहुंचीं, उस दिन मकर संक्रांति का दिन था। इस कारण से मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु गंगासागर में स्नान करने और कपिल मुनि की आश्रम के दर्शन करने के लिये एकत्रित होते हैं। मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने असुरों का अंत किया था एवं उन असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इस तरह से यह मकर संक्रांति का दिन बुराइयों और नकारात्मकता को ख़त्म करने का दिन कहा गया है।


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