पंकज कुमार सिंह। राष्ट्रनायक न्यूज।
मशरक (सारण)। बिहार सरकार लगातार विकास के लिए प्रयत्नशील है वहीं सरकार के विकास में प्रखंड अधिकारियों की लापरवाही करने से आम आदमी परेशान हैं।दीपक तले अंधेरा वाली कहावत प्रखंड मुख्यालय में चरितार्थ होती नजर आ रही है। पंचायतों में शौचालय बनवाने व ओडीएफ करने को लेकर जिस तरह प्रशासन सक्रिय दिखा, उस हिसाब से देखा जाये तो मशरक प्रखंड प्रशासन के नाक के नीचे यानी प्रखंड मुख्यालय में एक सुलभ शौचालय का नहीं होना स्वच्छता पर सवालिया निशान लगाता है।वहीं सबसे व्यस्त प्रखंड मुख्यालय मशरक में न तो एक भी सुलभ शौचालय की व्यवस्था है और न ही पीने का पानी, जिनकी सुध लेना प्रखंड प्रशासन भी मुनासिब नहीं समझता है. जबकि, आये दिन यहां हजारों की संख्या में महिला व पुरुषों का आना जाना होता है। प्रखंड कार्यालय परिसर में मनरेगा कार्यालय, बीडीओ व अंचल कार्यालय सहित आरटीपीएस काउंटर पर विशेष तौर पर वृद्धा पेंशन,जाति, आवासीय, आय, दाखिल खारिज, भू स्वामित प्रमाण पत्र, राशनकार्ड, जन्मप्रमाण, मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित कार्यों के लिए अपने कागजी कार्यों को लेकर यहां आनेवाली महिलाओं को यदि टॉयलेट लगे, तो भला वह कहां जायेंगी। जबकि इस प्रखंड परिसर में सभी विभागों के लगभग एक दर्जन कार्यालय स्थित है, जिसमें अपने विभिन्न कागजी कार्यों को लेकर हजारों लोगों का आवागमन होता है। हालांकि, इसमें से अधिकांश कार्यालय तो प्रखंड स्तर तक ही सीमित है। लेकिन अवर निबंधन कार्यालय में दूसरे प्रखंड के लोगों का आने का सबसे बड़ा जरिया है। इतनी संख्या में लोगों के आवागमन के बावजूद यहां सुलभ शौचालय के साथ पीने के पानी की सुविधा का नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता का परिचायक है। पूर्वी पंचायत से मुखिया प्रतिनिधि रहें अमर सिंह कहते हैं कि आम जनता के करोड़ों रूपयों पर अधिकारियों के ऐशगाह के लिए विकास हो रहा है वही आम आदमी एक शौचालय और पीने के साफ पानी के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। क्या यही विकास की परिभाषा हैं।



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