अरूण विद्रोही की रिर्पोट।
छपरा (सारण)। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत पंचायत राज विभाग के निर्देशानुसार दूसरे चरण का कार्य के तहत गांवों के आस- पास के पर्यावरण को बेहतर बनाने को ले अब ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक, पॉलिथीन और ठोस एवं तरल अपशिष्ट का प्रबंधन होगा। इसके तहत स्वच्छता के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अब स्थायी तरीकों से सामुदायिक स्तर पर ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन सहित ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक वार्ड में चयनित दो स्वच्छता कमीं डोर टू डोर प्लास्टिक, पॉलिथीन, धातुओं, कागज, कपड़े थर्माकोल को कंटेनर के माध्यम से एक निश्चित स्थान पर रखे कंटेनर में डालेंगे। फिर उस गीले और सूखें अपशिष्ट पदार्थों के निस्पादन के लिए गांव से अलग बने लैंडफ़िल (अपशिष्ट निपटान इकाई) यानी waste processing unit में लेजाकर रखेंगे। जहां इसका निपटारा किया जाऐगा। प्रथम चरण में नगरा प्रखण्ड के चार पंचायतों का चयन किया गया है जिनमें अफौर, खैरा, नगरा, तथा धुपनगर धोबवल पंचायत का चुनाव हुआ है जहां वहां के प्रत्येक वार्ड में डोर टू डोर कचरा उठाव किया जाएगा।

प्रत्येक वार्ड में दो स्वच्छता कर्मी का होगा चयन, मिलेंगे मानदेय के रूप में लगभग 3 हजार
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत पंचायत के प्रत्येक वार्ड को स्वच्छ बनाने के लिए डोर टू डोर गीला और सूखा कचरा उठाव के लिए प्रखण्ड में चयनित पंचायत के प्रत्येक वार्ड में दो स्वच्छता कर्मी की बहाली पंचायत राज विभाग के द्वारा किया जाऐगा। इसकी जानकारी देते हुए प्रखण्ड विकास पदाधिकारी व प्रखण्ड स्वच्छता समन्वयक ने बताया की प्रत्येक वार्डों में दो स्वच्छता कर्मचारी के चयन के लिए पंचायत के स्व्च्छताग्राही के साथ संबंधित पंचायत के विकास मित्र को प्रतिनियुक्त किया गया है ताकि स्वच्छता कर्मी को जल्द से जल्द चुनाव कर इसे ग्राम पंचायत के वार्ड सभा में पारित करा वार्डो में परिवारों द्वारा प्रत्येक घर के सामने रखें गीला और सूखा कचरे को उठा कर उसे गांव से अलग बने लैंडफिल यानी अपशिष्ट निपटान इकाई में पहुचाया जा सके। इसके लिए चयनित सभी स्वच्छता कर्मचारी को मानदेय के तौर पर लगभग 3 हजार रूपयें का भुगतान किया जाऐंगे।

स्वच्छताग्राही के जिम्में रहेगी वार्डो की साफ सफाई की निगरानी, प्रतिदिन करना होगा कार्यो को अपलोड
पंचायत के प्रत्येक वार्ड से ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन के लिए वार्ड में बहाल दो स्वच्छता कमीं डोर टू डोर कचरा उठाव की देख रेख पूर्व में बहाल स्वच्छताग्राही के जिम्में रहेगी। साथ ही इस अभियान के तहत होने वाले कार्या को प्रशासन के पोर्टल पर अपडेट की जाऐगी। वहीं जिला पंचायत राज विभाग को अभियान के तहत हुए कार्यों का ब्यौरा प्रत्येक को देना। इसके अलावा ग्राम पंचायतों में क्या बदलाव आया तथा ग्रामीण क्या सुझाव या शिकायत करते है, इसके बारे में भी पोर्टल पर जानकारी देनी होगी।

गांव से अलग जगह पर बनाया जाऐगा कचरा प्रबंधन यूनिट प्लांट
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक वार्ड में चयनित स्वच्छता कर्मचारियों के द्वारा डोर टू डोर प्लास्टिक, पॉलिथीन, धातुओं, कागज, कपड़े थर्माकोल के गील तथा सूखे अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के लिए पंचायत में आस पास बसे बसावटों से दूर waste processing unit यानी कचरा प्रबंधन यूनिट प्लांट बनाया जाऐगा। 4 हजार स्क्वायर फूट यानी सरल भाषा में कहे तो लगभग दो कठ्ठा जमीन जमीन की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए प्रत्येक चयनित पंचायत के मुखिया तथा पंचायत सचिव को स्थल चयनित करने की जिम्मेवारी दी गई है। साथ ही स्थल के एनओसी के लिए पत्र के माध्यम से अंचालाधिकारी के पास भेजा जाएगा ताकि एस स्थल पर लैंडफिल का निर्माण कराया जा सके।

क्या है कचरा प्रबंधन यूनिट यानी लैंडफिल्
यानी लैंडफिल यानी कचरा प्रबंधन यूनिट एक वैसी जगह है, जहां कूड़ा-कचरा रखा जाता है। इसे सामान्य भाषा में समझे तो, जमा हुए कचरे को जब भूमि में दफन करके कचरे का निपटान किया जाए उसे लैंडफ़िल कहते है। परंतु जहा लोग रहते है, वहा कभी भी लैंडफिल को नहीं रखा जा सकते। क्योकि उसमे दुर्गंध होती है। लैंडफिल कचरा प्रबंधन करने का सबसे लोकप्रिय उपाय है। इसमे कचरे को सबसे पहले लेंडफिल में लाकर छांटा जाता है। उसके बाद कचरे को छोटे टुकड़ों में कुचल कर दफनाया जाता है।

अपने आस- पास कचरे के फैलाव से लोग हो रहे संक्रमण का शिकार
आज के भाग दौर की जिंदगी में आस- पास फैला कचरा हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। अपनों द्वारा फैलाये जा रहें इन प्लास्टिक, कांच, दवाई की शीशियाँ, धातु, चमडा, इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसा ठोस अपशिष्ट भी हमारे लिए नुकसानकारक है। यह कचरा कई साल बीत जाने के बाद भी नष्ट नहीं होता है। इससे मलेरिया, टी.बी, पीलिया और हैजा जैसी कई बीमारियाँ उत्पन्न होती है। जिससे हर दिन लाखों लोगों की जाने जा रही है। इन कचरें की वजह से ही प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप या और कोई कुदरती समस्या हमारे पास हो रही है। कचरा मानव और प्रकृति के दैनिक कामकाज से उत्पन्न होता है। कचरें के इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट में आर्सेनिक, मरकरी, लेड और कैडमियम जैसे कई जहरीले पदार्थ होते है। यह पदार्थ पर्यावरण और मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते है। इसीलिए हमे कचरा प्रबंधन करना आवश्यक है।



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