बढ़ती हुई जनसंख्या के भयावह परिणाम: अमित नयन राज्य-पार्षद,एआईएसएफ बिहार
राष्ट्रनायक प्रतिनिधि।
छपरा (सारण)। प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को पूरा विश्व ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ का उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाता है। जिसका उद्देश्य जनसंख्या संबंधित समस्याओं पर वैश्विक चेतना जागृत करना है। इसका सर्वप्रथम आयोजन 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल द्वारा स्थापित किया गया था।इस दिवस का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है ,जिसमें परिवार नियोजन, लिंग समानता, मातृ स्वास्थ्य, गरीबी मिटाना साथ ही साथ मानव अधिकार के प्रति लोगों को जागरूक करना है। ज्ञात हो कि विश्व की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन यह वृद्धि बहुत असमान है। विश्व के सबसे कम विकसित देशों के लिए टिकाऊ विकास की दिशा में सबसे बड़ी चुनौती तेजी से बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता है। दूसरे देशों में अन्य प्रकार की समस्याएं हैं। वहां जनसंख्या में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा उन देशों को वृद्ध होते लोगों में स्वास्थ्य के प्रति गरूकता पैदा करने और पर्याप्त सामाजिक संरक्षण प्रदान करने की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।मातृत्व मृत्यु दर और अनापेक्षित गर्भधारण को कम करने के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। दुनिया भर में हम आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं सहित महिला अधिकारों पर जोर दे रहे हैं। गर्भावस्था से संबंधित समस्याएं अब भी 15 से 19 वर्ष की लड़कियों की मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। लिंग आधारित हिंसा जिसका कारण स्त्री-पुरुष असमानता है, भयावह स्थिति तक पहुंच चुकी है।आज भी हमारे देश में कई ऐसे पिछड़े इलाके व गांव हैं, जहां बाल विवाह की परंपरा प्रचलित है जिसके कारण कम उम्र से ही बच्चे पैदा होने शुरू हो जाते हैं, फलस्वरूप अधिक बच्चे पैदा होते हैं। शिक्षा का अभाव जनसंख्या वृद्धि की एक बड़ी वजह है। रूढ़िवादी सोच और पुरुष-प्रधान समाज में लड़के की चाह में लोग कई बच्चे पैदा कर लेते हैं।आज भी कई ऐसी जगहें हैं, जहां बड़े-बुजुर्गों की ऐसी सोच होती है कि यदि उनकी पुश्तैनी धन-संपत्ति अधिक है, तो उसे आगे बढ़ाने और संभालने के लिए ज्यादा लड़के पैदा किए जाएं। कई मामलों में शादीशुदा जोड़ों पर बच्चे पैदा करने का दबाव तक बनाया जाता है।शिक्षित और मध्यमवर्गीय परिवार की यह सोच कि ‘अधिक बच्चे विशेष तौर पर लड़के यानी उनके बुढ़ापे का सहारा’।हमारे देश में बहुत से बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। रोजगार की समस्या, यह साफतौर पर बताता है कि आपके बच्चे और देश के विकास में ज्यादा जनसंख्या रुकावट बनती है।नक्सलवाद जैसी समस्याओं का मूल कारण भी यही सामाजिक असमानता है, जो आगे जाकर लोगों में गरीबी-अमीरी के बीच फासले बढ़ाती है।इसे नियंत्रित करने के लिए घर-घर तक पहुंचकर लोगों को जनसंख्या रोकने के तरीके व विकल्प बताएं।युवाओं का 25-30 की उम्र से पहले विवाह न करें और 2 बच्चों के बीच कम से कम 5 साल का अंतर रखने की वजह समझाएं।अधिक बच्चे पैदा करने वालों का सामाजिक स्तर पर बहिष्कार करें, क्योंकि दूसरे भी यदि ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, तो इसका असर आपके बच्चों के भविष्य पर भी पड़ेगा। आपके बच्चों के लिए प्रतिस्पर्धा ज्यादा होगी और देश में बेरोजगार होने की आशंका बढ़ेगी।इन युक्तियों के प्रयोग के उपरांत पूरा विश्व समृद्धशाली, शांतिप्रिय मनोभाव के साथ तीव्रतम गति से विकास की ओर अग्रसरित हो पाएगा।


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