राष्ट्रनायक न्यूज।
छपरा (रुचि सिंह सेंगर)। शिक्षाविद व वरीय पत्रकार डॉक्टर लाल बाबू यादव ने कहा है कि आज से ठीक 48 वर्ष पहले 5 जून 1974 को जेपी ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था। अपनी बातों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा था कि यह डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की सप्त क्रांति की तरह ही है। यानी इसमें सामाजिक क्रांति, आर्थिक क्रांति, शैक्षणिक क्रांति, सांस्कृतिक क्रांति, आध्यात्मिक क्रांति आदि की अवधारणा सन्निहित है। हजारों लोगों के संघर्ष और आंदोलन के बाद भी आज तक संपूर्ण क्रांति का सपना साकार नहीं हो सका है।
आजादी अमृत महोत्सव तक यानी स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी हम लोक नायक की परिकल्पना को अमली जामा नहीं पहना सके। जबकि राज्यों के अवाम केंद्र में कई बार जेपी के अनुयायियों ने ही शासन सत्ता संभाला है। अब तो उनके विचारों तक को पाठ्यक्रम से भी हटाया जा रहा है। जिस वक्त जेपी संपूर्ण क्रांति की अवधारणा को स्पष्ट कर रहे थे। उस वक्त यानी 5 जून 2974 को मैं छपरा जेल में था। मेरी गिरफ्तारी उन्नीस मार्च को छात्र आंदोलन पर पुलिस गोलीकांड के सिलसिले में हुई थी। छपरा में मेरे नेतृत्व में जुलूस निकाला था। जिसमें नईम खां नामक छात्र पुलिस गोलीकांड का शिकार हो गया था। घटना के बाद सारण पुलिस मुझे खोज रही थी। परंतु मैं पुलिस को चकमा देते हुए प्रखंडों में जाकर तत्कालीन कांग्रेसी गफूर सरकार के खिलाफ छात्रों को संगठित कर रहा था। लगभग तीन महीने के बाद छपरा टाउन थाना के इंस्पेक्टर हरिहर चौबे ने छापा मारकर शहर के सलेमपुर मुहल्ले से मुझे गिरफतार कर छपरा जेल भेज दिया। उस वक्त मैं इंटर पास कर चुका था। परंतु अभी तक बीए में एडमिशन नहीं हुआ था।
राजेंद्र कॉलेज के राजनीति विज्ञान के हेड राय अखिलेंद्र प्रसाद ने मेरा नामांकन करने से साफ मना कर दिया था। छपरा में मेरी गिरफ्तारी 14 मई को हुई थी। उस वक्त देश व्यापी रेलवे का हड़ताल जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में चल रहा था। मुझे रेल कर्मचारी नेताओं के बैरक में जेल प्रशासन ने रखा था। हालांकि यह मेरी दूसरी गिरफ्तारी थी 1971 में 5 सितंबर को मेरी पहली गिरफ्फतरी पटना में हुई थी और मुझे बक्सर केंद्रीय कारा में रखा गया था। लगभग एक महीने बाद मुझे छपरा जेल से छूटने का अवसर मिला। वह भी जमानत पर बाद में बिहार में कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री बनने पर मुझ पर से मुकदमा उठाया गया।
बहरहाल, मेरे जैसे हजारों लोगों के संघर्ष और आंदोलन के बाद भी आज तक संपूर्ण क्रांति का सपना साकार नहीं हो सका है।


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