राष्ट्रनायक न्यूज।
छपरा (सारण)। देश के नए राष्ट्रपति चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के पहले दिन मढ़ौरा के लालू प्रसाद यादव ने दूसरी बार अपना नामांकन दर्ज कराया। भारतीय संविधान से प्राप्त अधिकार के तहत भारत के किसी भी नागरिक को चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है तो किसी भी चुनाव में उसे प्रत्याशी भी बनने का अधिकार प्राप्त है। लोकतांत्रिक देश के इन्हीं लोकतांत्रिक अधिकार, मूल्यों और नीतियों का फायदा उठाते हुए सारण के मढ़ौरा रहीमपुर पंचायत निवासी पेशे से अनुमंडल कोर्ट का ताईद लालू प्रसाद यादव दूसरी बार नामांकन दर्ज करा कर रायसीना हिल्स के रेस में अपनी दौड़ लगाने की पहली तैयारी कर दी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में छपरा संसदीय क्षेत्र से मढ़ौरा का लालू बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी के सामने थे। राबड़ी देवी राजद के चुनाव चिन्ह पर लड़ रही थीं जबकि लालू निर्दलीय प्रत्याशी थे। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजीव प्रताप रूडी को जीत मिली थी। लेकिन लालू तब राबड़ी देवी की हार के मुख्य कारण बन गए थे। राबड़ी देवी को करीब आठ हजार वोट से राजीव प्रताप रूडी के हाथों शिकस्त मिली थी। इधर निर्दलीय लालू प्रसाद को संयोग से 15 हजार के आसपास वोट मिल गए थे। तभी से मढ़ौरा के इस लालू को अचानक से सुर्खियां मिलने लगी थी। 2001 से लालू को नामांकन दर्ज कराने का है जुनून 2001 से मढ़ौरा के लालू ने पंचायत से वार्ड सदस्य के लिए नामांकन दर्ज कराया था । इसके बाद से विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद 2017 में राष्ट्रपति तक के चुनाव में नामांकन दाखिल कर चुके हैं लालू। इस बार फिर से राष्ट्रपति चुनाव 2022 में नामांकन दर्ज करा कर फिर से सुर्खियों में आने की कोशिश की है। लालू को अभी तक चुनावों में विजय श्री नहीं प्राप्त हुई है। इससे बिना निराश हुए लालू चुनाव जीतने तक लगातार चुनावों में नामांकन करने का अपना इरादा जताते है। राजद सुप्रीमों के नाम से मिल जाती है तरजीह राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक कर्मभूमि सारण रही है। इससे मढ़ौरा के हमनाम लालू प्रसाद यादव को तरजीह मिल जाती है। मढ़ौरा का लालू यादव अब तक सांसद, विधायक वार्ड (त्रिस्तरीय पंचायत) तक के चुनाव में अपना नामांकन दाखिल कर प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर चुके हैं। पिछले राष्ट्रपति चुनाव 2017 में भी इन्होंने नामांकन दाखिल कर प्रत्याशी बनने की कोशिश की थी। प्रस्तावक नहीं मिलने से इनका नामांकन रद्द हो गया था।
अबतक एक बार भी नहीं मिली है चुनाव में जीत
अभी तक एक भी चुनाव में इनको विजयश्री नहीं मिल पाई है। ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य से लेकर सर्वोच्च चुनाव राष्ट्रपति तक नामांकन करा के मढ़ौरा के लालू को जीत बहुत मायने भी नही रखता। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के हमनाम होने का फायदा मिल जाता है और मीडिया हाथों हाथ लेती है यही इस लालू के लिए काफी है। इनका नाम मीडिया में आने से आसपास के इलाके में लोग इनको जानने-पहचानने लगे हैं। लालू इसे ही अपनी उपलब्धि मानते है।


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