राष्ट्रनायक न्यूज।
छपरा (सारण)। नेशनल मूवमेंट फ़ॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के आह्वान पर पूरे बिहार में एक सितम्बर को काला दिवस मनाया गया, जिसमें सारण (छपरा) के एनपीएस कर्मियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। सारण (छपरा) में कार्यरत सरकारी कर्मियों ने काला बिल्ला लगाकर अपने कर्तव्यों का निष्पादन किया। छपरा शहर स्थित कॉलेजों तथा कार्यालयों के साथ-साथ प्रखंड स्तर के कार्यालयों में कार्यरत कर्मियों ने भी काला बिल्ला लगाकर एकजुटता जाहिर किया है। विदित हो कि 01 सितम्बर, 2005 के बाद नियुक्ति राज्य कर्मियों को पुरानी पेंशन से बेदखल कर नई पेंशन योजना (नेशनल पेंशन योजना) से आच्छादित कर दिया गया है। एनएमओपीएस के सारण (छपरा) जिला इकाई अध्यक्ष डॉ. दिनेश पाल कहा कि एन.पी.एस हमारे लिए एक झुनझुना मात्र है। सच कहा जाये तो नो पेंशन स्कीम जैसा है क्योंकि हाल ही में एनपीएस आच्छादित कर्मियों को सेवानिवृत्ति के उपरांत इतना कम पैसा मिल रहा है कि वो महीने का फल-सब्जी भी नहीं खरीद सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पुरानी पेंशन हमारा हक है और हम लेकर रहेंगे, इसके लिए सड़क पर भी उतरना पड़ेगा तो हम पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही डॉ. पाल ने बताया कि दर्जनों सरकारी सेवक संगठनों द्वारा लिखित समर्थन के साथ बिल्ला लगाकर सहयोग किया गया है। जिला सचिव मुकेश कुमार पांडेय ने कहा कि तन-मन से पैंतीस-चालीस साल सेवा देने वाले कर्मचारियों को बुढ़ापे में पुरानी पेंशन नहीं मिलेगा और नेता कुछ दिन के लिए भी एमपी-एमएलए बन जाते हैं तो उन्हें पुरानी पेंशन मिलती है और इतना ही नहीं बल्कि जितने सदन के सदस्य बनेंगे उतने का अलग-अलग पेंशन का प्रावधान है, भला यह कैसा न्याय है। जिला उपाध्यक्ष डॉ. अनुपम कुमार सिंह ने बताया कि बिहार के विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को अभी तक एनपीएस का भी लाभ नहीं मिल रहा है जो काफी हानिप्रद है। पुरानी पेंशन हमेशा से सभी के लिए लाभकारी रही है और आगे भी होगी। कई कॉलेजों तथा विभागों में एनपीएस कर्मियों के समर्थन में ओपीएस कर्मी भी काला बिल्ला लगाकर पुरानी पेंशन की माँग का समर्थन किया। मालूम हो कि हाल ही में राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में पुरानी पेंशन को बहाल किया गया है। इस मुहिम में मुख्य रूप से राजेंद्र महाविद्यालय, छपरा, जगलाल चौधरी महाविद्यालय, छपरा, नन्द लाल सिंह महाविद्यालय, दाउदपुर, एच आर कॉलेज अमनौर, रामजयपाल महाविद्यालय, जल संसाधन विभाग, आयुक्त कार्यालय, डीआईजी कार्यालय, कृषि विभाग, सहकारिता कार्यालय, एआरसीएस कार्यालय आदि के राज्य कर्मी शामिल हुए।
ऐसे समझें ओपीएस और एनपीएस में अंतर-
- ओपीएस में पेंशन में वेतन से कोई कटौती नहीं होती है जबकि एनपीएस में वेतन से 10 प्रतिशत की कटौती होती है।
- ओपीएस में जीपीएफ सुविधा उपलब्ध है, जबकि एनपीएस में जीपीएफ सुविधा नहीं है।
- ओपीएस एक सुरक्षित पेंशन योजना है, जबकि एनपीएस शेयर बाजार आधारित असुरक्षित योजना है।
- ओपीएस में रिटायरमेंट के समय निश्चित पेंशन जो अंतिम मूल वेतन के 50 प्रतिशत की गारंटी है, जबकि एनपीएस में रिटायरमेंट के समय निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं है।
- ओपीएस पर हरेक छः माह बाद मिलने वाला महंगाई भत्ता लागू होता है, जबकि एनपीएस पर नहीं लागू होता।
- ओपीएस के अंतर्गत प्राप्त पेंशन पर हर दस वर्ष पश्चात वेतन आयोग का लाभ प्राप्त होता है, जबकि एनपीएस के अंतर्गत प्राप्त पेंशन पर वेतन आयोग का लाभ प्राप्त नहीं होता है।
- ओपीएस में सरकार द्वारा ट्रेजरी के माध्यम से पेंशन भुगतान किया जाता है, जबकि एनपीएस में शेयर बाजार के आधार पर भुगतान किया जाता है।




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