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सारण में 5 प्रखंडों के 30 पंचायत के 107 गांव बाढ़ से प्रभावित, 54 सामुदायिक रसोइयों में 31 हजार 900 लोगों को दिया जा रहा भोजन, छपरा डीएम ने तरैया में बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से मिलकर जाना हाल 

सारण में 5 प्रखंडों के 30 पंचायत के 107 गांव बाढ़ से प्रभावित, 54 सामुदायिक रसोइयों में 31 हजार 900 लोगों को दिया जा रहा भोजन, छपरा डीएम ने तरैया में बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से मिलकर जाना हाल 

छपरा(सारण)। जिले के तरैया, पानापुर, मशरक में बाढ़ की प्रलयकारी लीला लगातार जारी है। पांच प्रखंडों पानापुर, तरैया, परसा, मकेर और मशरक के करीब 30 पंचायतों के 107 गाँव बाढ़ से प्रभावित हुए है। प्रभावित गाँवों में 73 गाँव चारों तरफ से पानी से घिरे हुए है। करीब 54 स्थानों पर सामुदायिक रसोई की व्यवस्था करायी गयी है, जहाँ 31 हजार 900 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला प्रशासन एवं एनडीआरएफ की टीम द्वारा लगातार बाढ़ पीड़ितोंं को हरसंभव मदद पहुंचाया जा रहा है। साथ ही एनडीआरएफ की टीम लगातार बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर पीड़ितों को उंचे स्थानों एवं जिला प्रशासन द्वारा बने आश्रय केन्द्रों में पहुंचा रही है। इसी बीच मंगलवार को जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन तरैया प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जायजा लेने पहुंचे। जहां बाढ़ प्रभावित ग्रामीण लोगों से मिलकर स्थिति की जानकारी प्राप्त की।  इस दौरान जिलाधिकारी ने प्रखंड में चलाये जा रहे कई राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई का भी निरीक्षण कर पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया  है। उन्होंने पीड़ित लोगों को आश्वस्त किया कि किसी को कोई पेरशानी न हो इसके लिए स्थानीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है। डीएम ने लोगों को पालीथिन सिट्स तुरंत उपलब्ध कराने तथा पर्याप्त संख्या में नावों का परिचालन कराने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में आवागमन में सहुलीयत हो इसकी व्यवस्था करायी जाय। कहा कि एनडीआरएफ की टीम को पंचायत वार लगाया जाय तथा इस टीम के साथ मेडिकल टीम भी रखा जाय। महिलाओं एवं बच्चों का रेस्क्यू सावधानी से किया जाय। गर्भवती महिला के रेस्क्यू पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

शरण स्थलों के 500 मीटर के अंदर सामुदायिक रसोई बनाने का निर्देश

जिलाधिकारी ने शरणस्थलों एवं सामुदायिक रसोई का निरीक्षण करते हुए कहा कि खाने का कैम्प ऐसा बनायें ताकि शरणार्थियों को 500 मीटर से अधिक नहीं जाना पड़े। अधिक से अधिक कैम्प चलाने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया। ताकि एक ही शरणस्थली पर ज्यादा की संख्या नहीं रहे और सभी को सहुलियत हो। इसके पूर्व जिलाधिकारी ने डीपीओ आईसीडीएस को शरणस्थली में रह रहे छह वर्ष तक के बच्चों को सुधा का दुग्ध चूर्ण वितरित कराने का निर्देश दिया था। डीपीओ श्रीमती वंदना पाण्डेय के द्वारा बताया कि आज 200 ग्राम के 156 पैकेट सूधा दूग्ध चूर्ण का वितरण कराया है। उन्होंने कहा कि 18 ग्राम दूध चूर्ण से एक ग्लास दूध बनाया जाता है।

आपदा राहत कार्य संचालन एवं पर्यवेक्षण के लिए पदाधिकारियों की टीम गठित
जिलाधिकारी ने बाढ़ को लेकर आपदा राहत कार्य संचालन एवं पर्यवेक्षण के लिए पदाधिकारियों की टीम गठित की गयी है। इसमें अपर समाहत्र्ता डॉ. गगन को मशरक एवं तरैया तथा अपर समाहर्ता विभागीय जाँच भरत भूषण प्रसाद को पानापुर, इसुआपुर और अमनौर प्रखंड का वरीय नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। प्रत्येक प्रखंड के लिए अलग से नोडल पदाधिकारी बनाये गये है और उनको निर्देश दिया गया है कि राहत बचाव कार्य, सामुदायिक किचन की व्यवस्था, नाव की व्यवस्था तथा अनुग्रह अनुदान का वितरण कराना सुनिश्चित करेंगे। जिलाधिकारी ने प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों को मेडिकल टीम बनाकर शरणस्थलों में रह रहे लोगों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने का निर्देश दिया है।

पांच प्रखंडों के 30 पंचायतों के 107 गांव बाढ़ से है प्रभावित
आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता ने बताया है कि सारण जिला के पाँच प्रखंडों पानापुर, तरैया, परसा, मकेर और मशरक के करीब 30 पंचायतों के 107 गाँव बाढ़ से प्रभावित हुए है। प्रभावित गाँवों में 73 गाँव चारों तरफ से पानी से घिरे हुए है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव का कार्य किया जा रहा है। करीब 99 नाव परिचालित करायी जा रही है। इसके अतिरिक्त 11 मोटर वोट लगाये गये है एवं एनडीआरएफ की टीम भी लोगों का सहयोग कर रही है। आपदा प्रबंधन अपर समाहर्ता ने बताया कि 54 स्थानों पर सामुदायिक रसोई की व्यवस्था करायी गयी है, जहाँ 31 हजार 900 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।