राष्ट्रनायक न्यूज

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छह माह तक शिशुओं को कराएं केवल स्तनपान, पानी तक भी न दें

  • स्तनान से बच्चे होंगे स्वस्थ और बलवान
  • आंगनबाड़ी सेविकाओं के द्वारा माताओं को किया जा रहा है जागरूक
  • जिले में चल रहा है पोषण अभियान

राष्ट्रनायक न्यूज।

छपरा (सारण) बेहतर पोषण के लिए व्यवहार परिवर्तन हर वर्ष सितंबर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जाता है। इस बार भी पोषण माह मनाया जा रहा है। पोषण माह के अंतर्गत स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सामुदायिक स्तर पर गर्भवती और धात्री महिलाओं को स्तनपान के फायदे बताए जा रहे हैं।छह माह तक बच्चों को केवल स्तनपान कराने की सलाह दी जा रही है। इस दौरान शिशु को पानी भी नहीं देना है। शिशु को पानी देने से संक्रमण का खतरा रहता है। बच्चा स्तनपान करने के बाद यदि दो घंटे सोता है तो समझ लेना चाहिए कि उसे पर्याप्त दूध प्राप्त हो रहा है। शिशु के लिए मां का दूध पर्याप्त हो, इसके लिए भी गर्भकाल की शुरुआत के साथ ही मां के पोषण पर ध्यान देना जरूरी होता है। मां के गर्भ में पल रहे शिशु के समुचित विकास के लिए भी यह जरूरी है।

पहले 1000 दिन की महत्ता पर चर्चा:

आईसीडीपीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए पहले 1000 दिन की महत्ता बताई जा रही है, इनमें से 270 दिन गर्भकाल के ही होते हैं। इसके बाद जन्म से दो वर्ष तक के 730 दिन। शिशु के जन्म के पहले 180 दिन केवल स्तनपान ही कराना है, यह शिशु के संपूर्ण विकास के लिए पर्याप्त होता है।

मिथकों पर न दें ध्यान, शिशुओं के लिए स्तनपान हीं पर्याप्त :

डीपीओ ने बताया कि प्रचलित मिथकों के कारण केवल स्तनपान सुनिश्चित नहीं हो पाता है। मां व परिवार को लगता है कि स्तनपान शिशु के लिए पर्याप्त नहीं है और वह शिशु को अन्य चीजें जैसे कि घुट्टी, शर्बत, शहद और पानी आदि पिला देती हैं जबकि स्तनपान से ही शिशु की पानी की भी आवश्यकता पूरी हो जाती है। कुछ माताएं गर्मियों के दिनों में शिशुओं को पानी पिलाती हैं ऐसा भी नहीं करना चाहिए क्योंकि मां के दूध में पर्याप्त पानी की मात्रा होती है। जिससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी नहीं होती।

क्या है आंकड़ा:

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे – 2019-20 के आंकड़ा के अनुसार जिले में छह माह तक 45 प्रतिशत बच्चों का सिर्फ स्तनपान कराया जाता है। वही 6 से 8 माह के 58.7 प्रतिशत बच्चों को स्तनपान के साथ साथ ऊपरी आहार भी दिया जा रहा है।